कुल पृष्ठ दर्शन : 197

You are currently viewing दिया मंत्र प्रभु मुक्ति

दिया मंत्र प्रभु मुक्ति

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)

***********************************************

था मन अशान्ति तजा गेह को,
सिद्धार्थ तपोवन निकल पड़ा
बोधवृक्ष तल की साधना,
सच शान्ति सुपथ परमार्थ मिला।

दया धर्म करुणा हृदय क्षमा,
सदाचार तप बल स्नेह मिला
पथिक अहिंसा बुद्ध सत्य पथ,
मुक्ति सुखी लक्ष्य पथ गेह मिला।

शान्तिदूत सादर नमन बुद़्ध,
मानवता द्योतक मान मिला
बुद्ध पूर्णिमा पुण्य तिथि दिवस,
अवतार बुद्ध भगवान मिला।

स्वारथ में मानव विचलित मन,
बुद्ध प्रकृति रूप सोपान मिला
हिंसा छल मिथ्या मनुज प्रकृति,
बुद्ध दिग्दर्शक वरदान मिला।

लिया जन्म संसार मनुज बन,
बस गौतम जन कल्याण मिला
दसवाॅं अवतारी विष्णु रूप,
शरणागत वत्सल त्राण मिला।

पुण्य दिवस निर्वाण तथार्थ,
ब्रह्मज्ञान महाप्रभु बुद्ध मिला
त्रिविध पाप संताप मुक्त बन,
सत्य ज्ञान सिद्धि मन शुद्ध बना।

रोग शोक मद मोह कोप जग,
लोभ द्वेष छल चहुँ पाप घिरा
दिया मंत्र प्रभु मुक्ति द्वार पथ,
शान्ति चित्त शुद्ध हमराह मिला।

शील त्याग गुण कर्मवीर प्रभु,
संसाधक हित संसार मिला
नीति रीति सच प्रीति पथिक प्रभु,
बुद्ध ज्ञान सुधा उपहार मिला।

नश्वर तन-धन लोक मोहवश,
अमर गीतबुद्ध उपकार मिला
बोध ज्ञान गौतम ‘गया’ धाम,
शुद्ध संस्कार आचार मिला।

अज्ञान तिमिर हरे लोक प्रभु,
ज्योतिर्मय ज्ञानालोक मिल
चले तथागत बुद्ध कर्म पथ,
सारनाथेश्वर शोक मिटा।

शरणागत हम प्रभु करें नमन,
हे कृपासिंधु भगवान सदा।
खिले चमन जग शान्ति अहिंसा,
मानवता मन सम्मान रहा॥

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥

Leave a Reply