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कल्पकथा और शब्द सागर के साहित्यिक संगम में बही सृजन-सुधा धारा

सोनीपत (हरियाणा)।

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार एवं शब्द सागर समूह इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में २५७ वीं साप्ताहिक काव्यगोष्ठी आयोजित की गई, जो साहित्यिक समन्वय और सृजनात्मक नवाचार का अनुपम उदाहरण बनी। इसकी अध्यक्षता डॉ. अखिलेश राव ने की मुख्य अतिथि अरुण सक्सेना उपस्थित रहे।
      संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह के अनुसार कार्यक्रम का शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना से हुआ। ५ घंटे तक चले इस विशेष आयोजन में ६० से अधिक काव्य रचनाओं का भावपूर्ण प्रस्तुतिकरण हुआ, जिसमें विविध भावों और साहित्यिक शैलियों का सुंदर समागम देखने को मिला।
काव्य पाठ में शब्द सागर समूह की ओर से डॉ. राव, अरुण सक्सेना, मनीषा पटेल मनु, मंजू मित्तल, अनिल ओझा, दीप्ति गुप्ता, दिनेश दवे, प्रशांत राव चौकसे, पूनम सिंह प्रियश्री, नीरल मंगला, कल्याणी गुप्ता कृति एवं परिवार की ओर से श्री डांगे, ‘माणिक’, बिनोद कुमार पाण्डेय, प्रमोद कुमार पटले, मणिका वर्मा, दिनेश कुमार दुबे, शोभा प्रसाद, भगवान दास शर्मा प्रशांत, रमापति मौर्य, ज्योति प्यासी, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र, नरेंद्र कुमार वर्मा नरेन, ब्रजेश चौहान, डॉ. मंजू शकुन खरे, सविता बांगड़ सुर, राधाश्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने अपनी मौलिक रचनाओं का पाठ किया।
समापन अवसर पर राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया।
   कार्यक्रम का संचालन भास्कर सिंह ‘माणिक’ एवं मनीषा पटेल मनु ने किया। संस्थापक राधाश्री शर्मा ने आभार व्यक्त किया।