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दीप पर्व

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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रोशनी से ज़िन्दगी….

दीप दिप-दिप है दमकता, खुश हुआ व्यवहार है।
भाव की माला पिरोकर, द्वार पर त्योहार है॥

काल मंगलमय-सुहाना,
अल्पनाएँ हैं सजीं।
रोशनी देती दुआएँ,
सरगमें लय में बजीं॥
बस्तियाँ उल्लास में सब, प्रेममय मनुहार है,
भाव की माला पिरोकर, द्वार पर त्योहार है…॥

राग महके आज तो बस,
द्वेष की तो है विदा।
दीप थाली में सजे हैं,
प्रेम की गूँजे सदा॥
सात्विकता की विजय है, धर्म तो उपहार है,
भाव की माला पिरोकर, द्वार पर त्योहार है…॥

आँधियाँ हारी हैं नित ही,
निश्छली संसार से।
दूरियाँ सिमटी हैं हरदम,
प्रेम की बौछार से॥
बढ़ रही हैं रौनकें, अब डर रहा अँधियार है,
भाव की माला पिरोकर, द्वार पर त्योहार है…॥

गीत दीपक गा रहा है,
सज गए सबके सदन।
वंदनाएँ खुश हुई हैं,
जोश में हर एक तन॥
थक गईं है आज कटुता, झूठ की तो हार है,
भाव की माला पिरोकर, द्वार पर त्योहार है…॥

मन हुए सबके सुपावन,
साँच की जयकार है।
हट रहा अवसाद अब तो,
मस्त हर फ़नकार है॥
हैं अनारों में चमक अब, नव हुआ संसार है,
भाव की माला पिरोकर, द्वार पर त्योहार है…॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।

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