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किसी का अनादर ना हो 

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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सफाई का कीड़ा, इस कदर न किसी को काटे,
कि सामने वाला इंसान, बेमौत ही मर जाए।

माना कि सफाई करना बहुत जरूरी है भाई,
पर हर बात में रोक-टोक अच्छी नहीं है भाई।

घड़ी की सुइयों पर, जब ज़िंदगी टिक जाए,
तो ज़िंदगी का मजा, धरा का धरा रह जाए।

धरती पर खेलना औेर दौड़ना बुरा नहीं है भाई,
बच्चे बेखौफ जमीन पर ही बड़े होते हैं भाई।

माना कि अनुशासन बहुत अच्छा होता है,
पर कभी-कभी अनुशासन तोड़ना भी खुशी देता है।

किसी का नियम टूटा, और किसी के चेहरे पर मुस्कान आई,
अगर कोई मर रहा हो उसको २ मिनट की खुशी, रौनक लाई।

सफाई अच्छी होती है, अनुशासन भी अच्छा होता है,
लेकिन किसी का अनादर ना हो, किसी का दिल ना टूटे।

सबका भी ख्याल रखना होता है, अपनी भी गरिमा होती है,
सफाई अभियान और अनुशासन से कोई भी ना रुठे।

‘हमारा समाज, तुम्हारा समाज’, कहकर अपमान नहीं करते हैं,
हर किसी के रहने-सहने का, अपना-अपना अंदाज होता है॥