हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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ज़िंदगी का नाम दोस्ती… (मित्रता दिवस विशेष)…
हर उम्र में जो साथ देता है,
वह ‘साथी’ मित्र ही तो है,
जो दोस्तों की दोस्ती को जीता है,
कभी भी यह ‘दोस्ताना’ छूटे ना, दोस्त हमसे रूठे ना…।
जो कंधे पर हाथ रख दे,
वह दोस्त जो दु:ख-सुख में साथ हो
चाहे कितने भी लोग हमसे दूर हो जाएँ,
पर कभी भी यह ‘दोस्ताना’ छूटे ना,
दोस्त हमसे रूठे ना…।
कृष्ण-सुदामा की ‘दोस्ती’ हमारी,
जग में है सबसे निराली।
दुश्मनों की भी ‘नज़र’ हमको ना लगे,
पर कभी भी यह ‘दोस्ताना’ छूटे ना,
दोस्त हमसे रूठे ना…॥