राधा गोयल
नई दिल्ली
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किसान लगातार मुझे अपनी कुदाल से खोदता रहा,
मैं कुछ नहीं बोली
जानती थी कि…
यह…
लोगों का पेट भरने के लिये,
फसल उगाने के लिये…
बीज रोपने के लिये…
मेरी गुड़ाई कर रहा है।
पर उस खनन माफिया को क्या कहूँ ?
जो ज्यादा धन कमाने की चाहत में…
मेरा लगातार खनन कर रहा है।
उस भू माफिया को क्या कहूँ ?
जो लगातार जंगलों को काट रहा है।
कोई पेड़ नहीं छोड़ा,
सब काट डाले
तालाब भी पाट डाले,
हरी-भरी वसुंधरा को,
कांक्रीट के जंगल में बदल डाला।
कैसे माफ कर दूँ इन हत्यारों को ?
इनकी करतूतों के कारण…
मैं गर्मी से अकुला रही हूँ,
मेरे बच्चे प्यासे मर रहे हैं
पीने के लिये पानी की मारा-मारी है,
थोड़ी सी बारिश आते ही बाढ़ आएगी
अपने साथ बहुतों की खुशियाँ भी, बहाकर ले जाएगी।
बंद करो अपनी यह धनलिप्सा,
यदि मैं अपनी पर आ गई तो
तुम सबको लील जाऊँगी।
पर अफसोस कि इसके कारण…
गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाएगा॥