नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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एक छोटा-सा बच्चा माँ की गोदी में किलकारियाँ मार रहा,
पर सोने का नाम नहीं ले रहा
रात बहुत हो गई, न सो रहा, न सोने दे रहा,
चाँद की रोशनी को खिड़की से देख रहा।
माँ ने कहा,-चलो तुमको एक लोरी सुनाती हूँ देशभक्ति की,
सुनते-सुनते सोना, अब सुनो एक लोरी
जिस देश में मेरा जन्म हुआ, उस देश की माटी प्यारी,
वह माँग रही बलिदान तुमसे, मेरे प्यारे-प्यारे बेटे।
तुम्हें देश की रक्षा करनी है, जैसे किया,
भगत सिंह ने अपनी नींद, भूख और प्यास त्याग कर
ऐसे ही तुझे बनना है इस देश के लिए,
भारत की माटी की सौगंध, तुझे देशभक्त बनना है।
तुम बड़ा होकर सैनिक बनना, देश की रक्षा करना,
इस मिट्टी का कर्ज़ चुकाना और अपना फ़र्ज़ निभाना
देश ने तुझे बहुत प्यार दिया, तुझे जीवन दिया,
अब देश की सेवा करना, यही तेरा फ़र्ज़ है बेटा।
तुम बड़े होकर डॉक्टर बनो, प्रोफेसर या इंजीनियर,
देश की तरक्की में अपना योगदान देना
देश के चहुँतरफ़ा विकास के लिए,
सतत प्रयास करते रहना।
चाहे शिक्षक बनो या प्रोफेसर, यह याद रखना,
हर बच्चे को योग्य बनाकर देश का भविष्य सँवारना
शिक्षा से देश की उन्नति और विकास होगा,
तभी हमारा भारत सबसे आगे होगा।
सो जा मेरे लाल, तुझे वीर बनाना है,
सो जा राजा, आँचल से मुँह ढक ले, यही तेरा तिरंगा है
हवा भी गाती रहे हर क्षण, वंदे मातरम्,
माँ दिल से कह रही, बेटा तुम डरना नहीं।
निडर होकर रहना, सीमा पर तुम भी,
देश की रक्षा करना, वीर जवानों की तरह
भारत की रक्षा में अपना जीवन लगा देना,
और देशवासियों के दिल में सम्मान पाना।
माँ की लोरी बेटे के सीने में देश का झंडा लहराएगी,
उसके मन में देशभक्ति की ज्योति जलाएगी।
माँ के दूध में देशभक्ति का भाव भर जाएगी,
ऐसे ही गा-गा कर माँ अपने बच्चे को सुलाएगी॥