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नई किरन उत्साह जगाए

कवि योगेन्द्र पांडेय
देवरिया (उत्तरप्रदेश)
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नई सुबह की नई किरन,
मन में उत्साह जगाए
प्रात: की शीतल पवन,
तन-मन में सिहरन छा जाए।
बुलबुल चहके फुदक-फुदक कर,
आम की डाली लहके।
मैं पथिक इस नूतन पथ का,
पग-पग पे चंदन महके॥