रचना पर कुल आगंतुक :348

You are currently viewing नई शुरुआत

नई शुरुआत

शशि दीपक कपूर
मुंबई (महाराष्ट्र)
*************************************

‘चलो,जैसे साल बीता,वैसे गिले-शिकवे की बीती बातें भूल जाओ! क्यों हठ करती हो बच्चों जैसी ? इतने साल बीत गए हैं साथ रहते,हम दोनों उन्हीं किनारों को पकड़े खड़े हैं,देखो,क्यों न नए साल में एक नई शुरुआत करते हैं। ‘
“कौन-सी नई शुरुआत..!”
“यही दिनभर चुप रहते हैं,एक-दूसरे का ख्याल रखते हुए दिन बिताते हैं। दोनों का मनमुटाव बोलने से ही शुरू होता है और मामूली-सी बात का बतंगड़ बन जाता है।’
सिर पर हाथ मार बोली, ‘धत! मैं तो बोले बिना रह ही नहीं सकती।”

Leave a Reply