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नवरात्रों का त्योहार…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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माता के नौ रंग…(नवरात्रि विशेष)…

नवरात्रों का त्योहार सजे,
माॅं दुर्गा के नौ रूप लिए।
हर दिन माता का रंग नया,
जो भोग लगा कर सुखी रखे॥
नवरात्रों का त्योहार…

प्रतिपदा शैलपुत्री माता,
पीताम्बर से सजकर दिखती।
गउ घी का भोग लगे तो माॅं,
हर जीवन में खुशियाँ रखती॥

माता द्वितीया ब्रह्मचारिणी,
हरियाली जो जग में लाती।
माता को चीनी भाती है,
शक्कर का भोग लगाती है॥

तप, त्याग, सदाचारी, गुण के,
संकल्प बताती है माता।
हर उम्र सजाती जीवन को,
जीवन सबका ही सज जाता॥
नवरात्रों का त्योहार…

मस्तक पर आधा चन्द्र लिए,
चन्द्रघंटा तृतीया माॅं सजती।
रंग सलेटी माॅं को भाता,
खुश दूध-भोग से माॅं रहती॥

चतुर्थी माता कुष्माण्डा,
निज उदर ब्रह्माण्ड सजा रखती।
नारंगी रंग अरु मालपुआ,
माता रानी की पसंद रहती॥

जग में ही जीवन को रहना,
फिर क्यों न रहे बनकर गहना।
यश-बल हर सुख देती माता,
सम्मान सदा जीवन पाता॥
नवरात्रों का त्योहार…

स्कंद माता का रूप लिए,
फिर श्वेत पंचमी माॅं आती।
कदली का भोग बहुत भाए,
पद्मासना माता कहलाती॥

षष्ठी माता फिर कात्यायनी,
कात्यायन महर्षि की पुत्री।
रंग-लाल, शहद है मन-भावन,
हैं धर्म अर्थ की माॅं दात्री॥

यश कर्म-धर्म से ही मिलता,
तब ही तो जीवन भी खिलता।
संतृप्त रहे जीवन सुख से,
कल्याण करें दुर्गा माता॥
नवरात्रों का त्योहार…

हर पाप, दैत्य, दानव, नाशक,
हैं कालरात्रि सप्तमी माता।
माॅं गुड़ का भोग लगाती हैं,
नीलाम्बर माॅं को भाता है॥

माॅं दुर्गा ने तप घोर किया,
तब रूप महागौरी का लिया।
काली माॅं पश्चात महागौरी,
आदिशक्ति दुर्गा रूप लिया॥

तप-त्याग भले होते मुश्किल,
पर इनसे सजती हर मंजिल।
हलवे का भोग लगाती माॅं,
रंग गुलाबी माता को भाता॥
नवरात्रों का त्योहार…

माता नवमी ऋद्धि-सिद्धि दात्री,
आती बनकर माॅं सिद्धीदात्री।
हर सुख है त्याग तपस्या से,
सिखला जाती है नवरात्रि॥

रंग बैंगनी भाता है,
माॅं भोग खीर का ही चाहे।
कुछ मांग न माता की रहती,
पर सुख सबका ही माॅं चाहे॥

दु:ख-दर्द मिटाती जीवन से,
हो आराधना माॅं की हर मन से।
शुभ फल देती है नवरात्रि,
दुर्गा माता जो ले आती॥
नवरात्रों का त्योहार…

परिचय–हीरा सिंह चाहिल का उपनाम ‘बिल्ले’ है। जन्म तारीख-१५ फरवरी १९५५ तथा जन्म स्थान-कोतमा जिला- शहडोल (वर्तमान-अनूपपुर म.प्र.)है। वर्तमान एवं स्थाई पता तिफरा,बिलासपुर (छत्तीसगढ़)है। हिन्दी,अँग्रेजी,पंजाबी और बंगाली भाषा का ज्ञान रखने वाले श्री चाहिल की शिक्षा-हायर सेकंडरी और विद्युत में डिप्लोमा है। आपका कार्यक्षेत्र- छत्तीसगढ़ और म.प्र. है। सामाजिक गतिविधि में व्यावहारिक मेल-जोल को प्रमुखता देने वाले बिल्ले की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल और लेख होने के साथ ही अभ्यासरत हैं। लिखने का उद्देश्य-रुचि है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नीरज हैं। प्रेरणापुंज-धर्मपत्नी श्रीमती शोभा चाहिल हैं। इनकी विशेषज्ञता-खेलकूद (फुटबॉल,वालीबाल,लान टेनिस)में है।

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