भारतीय भाषाओं की उपेक्षा की शिकायत…
सेवा में,
श्री एन.के. पटेल,
उपायुक्त (परीक्षा अनुभाग),
नवोदय विद्यालय समिति,
स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय) भारत सरकार)
बी-१५, संस्थानिक क्षेत्र,
सेक्टर-६२, नोएडा – २०१३०९।
विषय:नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा २०२७ की विवरणिका व आवेदन पोर्टल में हिन्दी/भारतीय भाषाओं की उपेक्षा — राजभाषा नियम ११ के सतत उल्लंघन एवं छात्रों के संवैधानिक भाषाई अधिकारों के हनन का विरोध।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि नवोदय विद्यालय समिति द्वारा प्रवेश परीक्षा २०२७ हेतु विवरणिका केवल अंग्रेजी में जारी की गई है तथा ऑनलाइन आवेदन पोर्टल में भी हिन्दी को समुचित स्थान नहीं दिया गया है। यह कोई पृथक अथवा नई शिकायत नहीं है, बल्कि उसी विसंगति की निरंतरता है जिस पर पूर्व में भी बार-बार ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है।

यह विषय पूर्व से लंबित है और निरंतर उपेक्षित रहा है, इस संबंध में इससे पहले भी विस्तृत विधिक शिकायतें (९ अक्टूबर २०२५ तथा २८ दिसम्बर २०२५ को, तथा द्वितीय अनुस्मारक (२० मई २०२६ को प्रेषित) है। इन पत्रों में समिति के आवेदन-पत्रों, पंजीकरण प्रणाली व विवरणिकाओं में राजभाषा नीति की अवहेलना को साक्ष्य सहित रेखांकित किया गया था। खेद का विषय है, कि इतना समय व्यतीत होने के बावजूद प्रवेश परीक्षा २०२७ की विवरणिका में भी वही त्रुटियाँ दोहराई गई हैं, जो यह दर्शाता है कि समिति के स्तर पर अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कार्यवाही नहीं की गई।

संवैधानिक एवं नियमगत उल्लंघन (सटीक प्रावधान सहित) अनुच्छेद ३४३ और राजभाषा नियम १९७६ के नियम ११ के अनुसार ऐसी विवरणिकाएँ एक ही फाइल में डिगलॉट (हिन्दी-अंग्रेजी) प्रारूप में जारी करना अनिवार्य है। इतना ही नहीं, नियम ११(३) के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार हिन्दी पाठ को अंग्रेजी के ऊपर प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य है, तथा हिन्दी के अक्षरों का आकार अंग्रेजी के अक्षरों से किसी भी स्थिति में छोटा नहीं रखा जा सकता। वर्तमान विवरणिका व पूर्व में उपलब्ध रहे आंशिक द्विभाषी फॉर्मों में भी हिन्दी को अंग्रेजी के नीचे रखा गया, जो नियम की मूल भावना और शब्दशः प्रावधान दोनों का उल्लंघन है।

छात्रों के अधिकारों का हनन:-नवोदय विद्यालयों में अधिकांश छात्र ग्रामीण एवं भारतीय भाषा-माध्यम पृष्ठभूमि से आते हैं। विवरणिका और पोर्टल को केवल अंग्रेजी में रखना यह मानकर चलता है कि जो अंग्रेजी नहीं जानता वह ‘कमतर’ है — यह सोच ही भेदभावपूर्ण है और अस्वीकार्य है, आप अंग्रेजी के आधार पर भेदभाव मत कीजिए। भाषा किसी बच्चे की योग्यता की कसौटी नहीं होनी चाहिए, फिर भी अंग्रेजी थोपकर उन्हीं छात्रों को असुविधा में डाला जा रहा है जिनके लिए यह योजना विशेष रूप से बनाई गई थी। नवोदय विद्यालयों की परिकल्पना राष्ट्रीय एकता व हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए की गई थी, पर ऐसा प्रतीत होता है कि आप लोग सब भूल चुके हैं। कृपया इन उद्देश्यों को पुनः आत्मसात कीजिए।

तकनीकी बाधा और समिति का निराधार तर्क:-ऑनलाइन आवेदन पोर्टल के ड्रॉप-डाउन मेनू केवल अंग्रेजी में हैं, तथा नाम, पिता का नाम, माता का नाम व स्थायी पता जैसे विवरण देवनागरी लिपि में भरने हेतु कोई पृथक फील्ड उपलब्ध नहीं है। समिति का यह तकनीकी-प्रशासनिक तर्क कि बहुभाषिक विवरण दर्ज करने से वर्तनी अथवा नामों की एकरूपता में विसंगति उत्पन्न होगी, आधुनिक भाषा प्रौद्योगिकी के इस युग में पूर्णतः आधारहीन है। गृह मंत्रालय के पहचान पत्र सत्यापन कार्यक्रम तथा आधार पंजीकरण प्रणाली में प्रत्येक नागरिक को अपनी मातृभाषा और देवनागरी में विवरण भरने की निर्बाध सुविधा दी गई है, जो तकनीकी व विधिक दोनों दृष्टि से पूर्णतः सफल सिद्ध हुई है। ऐसे में जब देश की अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियाँ समानांतर इनपुट जोड़कर नागरिकों को भाषाई स्वतंत्रता दे रही हैं, तब एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था द्वारा केवल अंग्रेजी की अनिवार्यता बनाए रखना भाषाई आधार पर भेदभाव है, और इसे ‘तकनीकी कठिनाई’ कहकर टाला नहीं जा सकता।

समय-सीमा की तात्कालिकता:- आवेदन की अंतिम तिथि ३१ जुलाई २०२६ निर्धारित है, अतः इस विषय पर विलंब किए बिना तत्काल कार्यवाही आवश्यक है।
अतः पूर्व पत्रों/अनुस्मारकों में उठाई गई मांगों को दोहराते हुए, प्रवेश परीक्षा २०२७ के संदर्भ में निम्नलिखित माँगें प्रस्तुत हैं:

केवल अंग्रेजी में जारी विवरणिका तत्काल वापस ली जाए।

नियम ११ तथा ११(३) के अनुरूप एक ही फाइल में डिगलॉट (हिन्दी-अंग्रेजी) विवरणिका जारी हो, जिसमें हिन्दी पाठ अंग्रेजी के ऊपर तथा समान अथवा बड़े अक्षर आकार में हो; तथा अन्य भारतीय भाषाओं में भी विवरणिका उपलब्ध कराई जाए।

जब तक उपरोक्त सुनिश्चित न हो, तब तक आवेदन की अंतिम तिथि आगे बढ़ाई जाए।

ऑनलाइन फॉर्म में नाम, पिता का नाम, माता का नाम व पते हेतु देवनागरी लिपि की पृथक (समानांतर) फील्ड जोड़ी जाए, तथा सभी ड्रॉप-डाउन मेनू पूर्व निर्धारित रूप से द्विभाषी बनाए जाएँ।

प्रवेश पत्र, परीक्षा अधिसूचनाएँ, परिणाम सूचियाँ व समय-सारणी भी राजभाषा अधिनियम, १९६३ की धारा ३(३) के अनुपालन में डिगलॉट प्रारूप में जारी हों, जिसमें हिन्दी पाठ को प्राथमिकता प्राप्त हो।

चूँकि, यह विषय विगत कई माह से लंबित है, अतः इस बार ठोस समयबद्ध कार्ययोजना के साथ लिखित सूचना दी जाए।
यह पत्र किसी भाषा के विरोध में नहीं, बल्कि भाषाई समानता, संवैधानिक प्रावधानों के अनुपालन और छात्रों के अधिकारों की रक्षा हेतु लिखा गया है। अंग्रेजी को श्रेष्ठता का मापदंड बनाकर भारतीय भाषाओं की उपेक्षा करना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि लाखों ग्रामीण छात्रों के प्रति अन्याय भी है।
अतः, आपसे विनम्र किन्तु दृढ़ प्रार्थना है कि इस विषय का तत्काल संज्ञान लेते हुए उचित एवं ठोस कार्यवाही सुनिश्चित करें एवं विद्यार्थियों के संवैधानिक भाषाई अधिकारों की रक्षा करें।
भवदीय,
विपुल कुमार जैन
(वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)