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रहे अटूट सदा यह बंधन

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)…

श्रावणी पूर्णिमा का दिन,
मन में उमड़ा मधुर उमंग
बहना के कर से बँधता है
रक्षा का यह सूत्र अनंग।

केवल यह एक नहीं है धागा,
है विश्वास अटल अनमोल
बहना के हाथों ने बाँधा,
उस राखी का नहीं है मोल।

बचपन की सारी स्मृतियाँ,
क्षण में जीवित हो जातीं
रूठे मन की छोटी बातें
हँसते-हँसते वे मुस्कातीं।

बहना माँगे क्या जग से-
बस भैया का सुख वैभव,
उसका पथ हो सदा सुनहरा
बढ़े सदा उसका गौरव।

भाई भी मन में यह ठाने-
बहना का सम्मान रहे,
उसकी हर पीड़ा के आगे
भाई बनकर ढाल रहे।

रिश्ते केवल नहीं रक्त से,
विश्वास से अमर हुआ करते
रक्षाबंधन के पावन धागे,
हृदयों को जोड़ा करते।

स्नेह रहे, विश्वास रहे,
रहे अटूट सदा यह बंधन।
जन्म-जन्म तक यूँ महके,
भाई-बहन का रक्षाबंधन॥