Visitors Views 61

नव आश किरण मुस्काती है

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’
बेंगलुरु (कर्नाटक)

***********************************************

नभ भोर अरुण चहुँ ओर शोर,
पशु विहग प्रकृति चितचोर मोर,
हलधर किसान उठ लखि विहान,
नव आश किरण मुस्काती है।

चहुँ प्रगति भाव नव उषा काल,
रवि लाल तिलक आकाश भाल,
कुसुमित सरोज खिल कुसुमाकर,
यौवन तरंग लहराती हैं।

नव सोच प्रगति नव जोश भोर,
नवशक्ति सबल तम मिटा घोर,
चल पड़ा सजग जग कर्म सुपथ,
हिय आश क्षितिज मन भाती है।

सद्भाव हृदय सम्प्रीति मधुर,
शुभ सुबह मनोहर भाव मुखर,
चहुँ शान्ति विमल आरोह लक्ष्य,
दिल देशभक्ति इठलाती है।

सीमांत अटल युव शौर्य प्रखर,
बलिदान अमर निशि भोर शिखर,
जीवन अर्पित रक्षण भारत,
रण गीत विजय रच जाती है।

तज आलस मन नव भोर किरण,
नव शोध सुपथ हो नव चिन्तन,
बन कर्मवीर रच फलक कीर्ति,
स्वर्णिम गाथा लिख जाती है।

उत्थान मनुज कल्याण जगत,
मुस्कान अधर खुशियाँ अविरत,
सम एक भाव जग जीवन जन,
संतोष प्रीति मन भाती है।

सहयोग परस्पर मानव मन,
रवि नवप्रभात संदेश किरण,
परमार्थ निकेतन सुख सब जन,
बस स्वार्थ निशा मिट जाती है।

बन नार्यशक्ति वात्सल्य किरण
देती ऊर्जा स्नेहिल चितवन,
मन क्षमा दया करुणार्द्र हृदय,
गुरु ज्ञान ज्योति बन जाती है।

अनमोल समय सूचक प्रभात,
गर्मी बरखा सर्दी बिसात,
जो चले समय के धरे हाथ,
शुभ सिद्धि साॅंझ बन जाती है।

खिलता निकुंज नव उषा किरण,
चहुँ सरित सलिल तरु हरित सघन।
सुललित कलित मधुरिम कविता,
कवि अन्तर्मन लिख जाती है॥

परिचय-डॉ.राम कुमार झा का साहित्यिक उपनाम ‘निकुंज’ है। १४ जुलाई १९६६ को दरभंगा में जन्मे डॉ. झा का वर्तमान निवास बेंगलुरु (कर्नाटक)में,जबकि स्थाई पता-दिल्ली स्थित एन.सी.आर.(गाज़ियाबाद)है। हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी,मैथिली,बंगला, नेपाली,असमिया,भोजपुरी एवं डोगरी आदि भाषाओं का ज्ञान रखने वाले श्री झा का संबंध शहर लोनी(गाजि़याबाद उत्तर प्रदेश)से है। शिक्षा एम.ए.(हिन्दी, संस्कृत,इतिहास),बी.एड.,एल.एल.बी., पीएच-डी. और जे.आर.एफ. है। आपका कार्यक्षेत्र-वरिष्ठ अध्यापक (मल्लेश्वरम्,बेंगलूरु) का है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप हिंंदी भाषा के प्रसार-प्रचार में ५० से अधिक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़कर सक्रिय हैं। लेखन विधा-मुक्तक,छन्दबद्ध काव्य,कथा,गीत,लेख ,ग़ज़ल और समालोचना है। प्रकाशन में डॉ.झा के खाते में काव्य संग्रह,दोहा मुक्तावली,कराहती संवेदनाएँ(शीघ्र ही)प्रस्तावित हैं,तो संस्कृत में महाभारते अंतर्राष्ट्रीय-सम्बन्धः कूटनीतिश्च(समालोचनात्मक ग्रन्थ) एवं सूक्ति-नवनीतम् भी आने वाली है। विभिन्न अखबारों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। विशेष उपलब्धि-साहित्यिक संस्था का व्यवस्थापक सदस्य,मानद कवि से अलंकृत और एक संस्था का पूर्व महासचिव होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी साहित्य का विशेषकर अहिन्दी भाषा भाषियों में लेखन माध्यम से प्रचार-प्रसार सह सेवा करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-महाप्राण सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ है। प्रेरणा पुंज- वैयाकरण झा(सह कवि स्व.पं. शिवशंकर झा)और डॉ.भगवतीचरण मिश्र है। आपकी विशेषज्ञता दोहा लेखन,मुक्तक काव्य और समालोचन सह रंगकर्मी की है। देश और हिन्दी भाषा के प्रति आपके विचार(दोहा)-
स्वभाषा सम्मान बढ़े,देश-भक्ति अभिमान।
जिसने दी है जिंदगी,बढ़ा शान दूँ जान॥ 
ऋण चुका मैं धन्य बनूँ,जो दी भाषा ज्ञान।
हिन्दी मेरी रूह है,जो भारत पहचान॥

Leave a Reply

Your email address will not be published.