ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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जीवन निर्माता… (गुरु पूर्णिमा विशेष)…
गुरु बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान बिना प्रकाश नहीं,
प्रकाश नहीं है तो, जीवन की कल्पना नहीं।
प्रकाश भी बंधु, दो तरह का होता है,
एक प्रकाश, आंतरिक प्रकाश होता है।
दूसरा प्रकाश, बाह्य उजाला होता है,
दोनों सुखी जीवन के लिए जरूरी होता है।
गुरु हमें आंतरिक सुख, के लिए प्रेरित करते हैं,
वे हमें इहलोक से, पारलौकिक सुख दिलाते हैं।
गुरु को भगवान से, भी बड़ा दर्जा प्राप्त है,
गुरु के बिना हर ओर, घोर अंधकार व्याप्त है।
अगर गुरु और भगवान, दोनों साथ में आए,
तो पहले गुरु को नमन करना, ईश्वर सिखाए।
गुरु ही ब्रह्म, गुरु ही विष्णु, गुरु ही महेश हैं।
तीनों लोक को बतलाते, गुरु हमारे ईश हैं।
गुरुओं का मत करना, कभी भी अपमान,
हमारा देश गुरुओं का, इसका है अभिमान।
प्रथम गुरु हमारे, माता-पिता होते हैं,
चलना-बोलना, समाज में रहना सिखाते हैं।
द्वितीय गुरु हमारे, शिक्षक होते हैं,
विद्यालय में शिक्षा और जीना सिखाते हैं।
तृतीय गुरू हमारे आध्यात्मिक होते हैं,
वे मृत्यु से पहले और बाद की दुनिया बताते हैं।
सभी गुरुओं का, अपना-अपना महत्व है,
तभी तो सभी जनों का ही गुण देवत्व है॥