सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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जीवन निर्माता (गुरु पूर्णिमा विशेष)…
गुरु पूर्णिमा, गुरु महिमा गाएं,
उद्विग्नता, कष्टों से मुक्ति पाएं
जीवन पथ पर खुशियां लाएं,
गुरु पद-पंकज पुष्प बिछाएं।
सर पर जिसके गुरु-हस्त होता,
अन्तर्मन गुरु भक्ति होता
सन्मार्ग की राह, मानुष होता,
गुरु महिमा का उद्गार होता।
गुरु बिन ज्ञान दुर्लभ होता,
गुरु की शरण सौभाग्य होता
ज्ञान की गंगा, गुरु कृपा होती,
जीवन निर्मल, हरि कृपा होती।
मिलते नहीं गुरु, बिनु विधाता,
प्रह्लाद, मीरा, ध्रुव… गुरु मंत्र पाता
घनेरी पीड़ा, आह! गुहार लगाते,
करूणानिधि जब दौड़े आते।
जग में ख्याति, उच्च पद पाते,
भक्त-भगवान दर सहज पाते
कल्पतरु, पय रसपान पाते,
गुरु की छाया सदा ही पाते।
जीवन-मंत्र, गुरु ही सिखाते,
मन-वचन-कर्म, स्वच्छ बनाते
सत्य वचन, सर्व-धर्म प्रेम सिखाते,
अवगुण, संकट स्वत: भगाते।
चित गुरु-गोविंद छवि दिखाते,
भवसागर की राह दिखाते
गुरु-कृपा अपरम्पार होती,
जीवन-सरस, व्यग्रता न होती।
गुरु कृपा, सर्वसिद्धि पाते,
धन्य जो मनुज, गुरु कृपा पाते
भंवर में नैया, पार लगाते,
जीवन श्रेष्ठ, साकार बनाते।
गुरु महिमा मैं क्या सुनाऊं,
सद्गुरु गर शरण ‘मैं’ पाऊं।
जीवन सार, शांति, सत्संग पाऊं,
भक्ति कुंदन, क्षमा, दोष मिटाऊं॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।