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नारी सशक्तिकरण

सुशीला रोहिला
सोनीपत(हरियाणा)
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नारी ने जब-जब अपनी शक्ति को पहचाना,
पहचान में ही पहचान बनी उसकी नई पहचान।
शक्ति का रूप है नारी,सतीत्व की पहचान,
नारी से ही जन्मे ध्रुव,प्रहृलाद और भगवान॥

नारी कमजोर नहीं,नारी के बल का तौल नहीं,
त्रिदेव वात्सल्य रस में डूबे बने बाल भगवान।
बनकरअपमान की ज्वाला दहक उठा गगन,
द्रौपदी बन मिटा दिया अंहकार का वृक्ष॥

नारी के रक्त में हो स्वाभिमान की धारा,
बने संतान स्वावलंबी,जगत उजियारा।
वीर लव-कुश का धरा पर है उजियारा,
सीता माँ के आत्म-बल का है पसारा॥

नारी की शक्ति का बल परा-विद्या बना,
मातृत्व का रस पान हो निस्वार्थ से भरा।
चोर लुटरे,आन्तकवाद,भ्रष्टाचार का हो सफा,
मानवता का संचार बढ़े,शांति चित्त हो भरा॥

भौतिक विधा का ज्ञान नारी को मिला,
अंतरिक्ष में नारी की बनी नई पहचान।
चाँद पर भी उतारा उसने अपना यान,
कल्पना कर ‘कल्पना’ बन मिला है सम्मान॥

हे विश्व जन! माता अबला बालाओं का,
तिरस्कार छोड़ो,धर्म की मर्यादा पहचानो।
बलात्कार चित्त का हो हनन महके चमन,
अपरा विद्या में परा विद्या का हो मिलन॥

माताएँ,बहनों से है कहना,आत्मशक्ति है गहना,
श्वांस की जानो माला,राम कृष्ण का है कहना।
सदगुरु चरणों का मिले जब सहारा,
तब ही विश्व में उज्ज्वल हो देश हमारा॥

आओ सब नर-नारी मिलकर ऐसा यज्ञ करें।
विश्व सुरक्षित हो हमारा कुछ ऐसा यत्न करे।
शांति का साम्राज्य लाएँ विश्व का मंगल करें,
सदभावना जगे हमारी,विश्व का कल्याण करें॥

परिचय-सुशीला रोहिला का साहित्यिक उपनाम कवियित्री सुशीला रोहिला हैl इनकी जन्म तारीख ३ मार्च १९७० और जन्म स्थान चुलकाना ग्राम हैl वर्तमान में आपका निवास सोनीपत(हरियाणा)में है। यही स्थाई पता भी है। हरियाणा राज्य की श्रीमती रोहिला ने हिन्दी में स्नातकोत्तर सहित प्रभाकर हिन्दी,बी.ए., कम्प्यूटर कोर्स,हिन्दी-अंंग्रेजी टंकण की भी शिक्षा ली हैl कार्यक्षेत्र में आप निजी विद्यालय में अध्यापिका(हिन्दी)हैंl सामाजिक गतिविधि के तहत शिक्षा और समाज सुधार में योगदान करती हैंl आपकी लेखन विधा-कहानी तथा कविता हैl शिक्षा की बोली और स्वच्छता पर आपकी किताब की तैयारी चल रही हैl इधर कई पत्र-पत्रिका में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका हैl विशेष उपलब्धि-अच्छी साहित्यकार तथा शिक्षक की पहचान मिलना है। सुशीला रोहिला की लेखनी का उद्देश्य-शिक्षा, राजनीति, विश्व को आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार मुक्त करना है,साथ ही जनजागरण,नारी सम्मान,भ्रूण हत्या का निवारण,हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनाना और भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान प्रदान करना है। लेखन में प्रेरणा पुंज-हिन्दी है l आपकी विशेषज्ञता-हिन्दी लेखन एवं वाचन में हैl