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नारी हूँ मैं

नेहा लिम्बोदिया
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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कई रूप हैं मेरे,
कभी चंचल चाँदनी
कभी गंभीर गहराई लिए हूँ।
कभी शांत समुद्र-सी,
लेकिन लिए हलचल बहुत हूँ।
सृष्टि का आधार भी मैं हूँ,
और इसको सँवारने वाली भी मैं हूँ।
क्या बोलूँ ?
क्या हूँ मैं…?
बस एक नारी हूँ मैं…,
बस एक नारी हूँ मैं…॥