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निर्मल वर्मा की कहानियों की याद दिलाता है ‘रेत के घरौंदे’ का कथानक

भोपाल (मप्र)।

मीनाधर पाठक की कहानी ‘रेत के घरौंदे’ का कथानक निर्मल वर्मा की कहानियों की याद दिलाता है। जहाँ वर्तमान की एक छोटी-सी खिड़की अतीत के दरवाज़े खोलती है। इनकी कहानी में भी अतीत पानी की लहरों पर चलकर आता है और इन्हीं से अपनी कहानी सुनाकर ख़त्म भी करता है। कहानी में दिये गए विवरण एक सुन्दर चित्र की रचना करते हैं और वह चित्र पाठक को दिखाई भी देता है।
     मुख्य अतिथि मीनाक्षी दुबे ने मीनधर पाठक की कहानी का विश्लेषण करते हुए यह बात कही। अवसर रहा अंतररष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच द्वारा शनिवार को आभासी माध्यम से हुए ‘कहानी संवाद’ कार्यक्रम का, जिसकी अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव रहीं। आपने कहा कि-
साहित्य की प्रत्येक विधा में कहानी है। बिना कहानी के लेखन संभव नहीं है। वर्णन और घटनाओं को यदि सीमित किया जाए तो कहानी प्रभावी बन जाती है।
   विशिष्ट अतिथि रानी सुमिता ने कहा कि डॉ. सबीहा रहमानी की कहानी ‘भटकन’ एक भाव प्रधान कहानी है। इसमें अनेक सुन्दर बिम्ब हैं। दिसम्बर के महीने का रूपक बहुत सुन्दर है। यह कथाकार के वैचारिक स्तर का प्रतिबिम्ब भी है। जया केतकी शर्मा ने अतिथियों का भावभीना स्वागत किया।
   इस अवसर पर कहानीकार मृदुला मिश्रा ने कहा कि कहानियों में वर्णन अधिक था। इसे कम किया जा सकता था। वरिष्ठ उपन्यासकार राज बोहरे ने विशेष टिप्पणी में कहा कि कहानियाँ कुछ ज़्यादा ही लम्बी थीं। दरअसल हर एक कहानी के दो-तीन ड्राफ्ट तैयार किये जाने चाहिए।
    संचालन मुज़फ़्फ़र सिद्दीक़ी ने किया। आभा दवे ने आत्मीय आभार व्यक्त किया।