मंडला (मप्र)।
समाचार पत्र-चैनल की सतत प्रस्तुतियों के अनुसार ही उसका महत्व स्थापित होता है।पत्रकारिता को सदैव ही सकारात्मक रहने व वैचारिक दृष्टि से समृद्ध रहकर राष्ट्र के प्रति कर्तव्यपरायण रहना चाहिए।
‘पत्रकारिता के मूल्य और सामाजिक सरोकार’ विषय पर साहित्यकार प्रो. शरद नारायण खरे ने यह बात भारतीय साहित्य संगम के संयोजक डॉ. धीरेंद्र राँगड़ के संयोजन में भारतीय साहित्य संगम (उत्तराखंड) द्वारा ‘शब्दों का कारवाँ-३६८ वीं व्याख्यानमाला में कही। अनेक श्रेष्ठ कृतियों के सृजक डॉ. खरे के इस विशेष व्याख्यान को अनेक लोगों ने देखा-सुना और सराहा।
द्वितीय चरण में प्रो. खरे के साथ शामिल कवियों ने शानदार काव्य पाठ किया। सभी को साहित्य भास्कर अलंकरण का प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।