Visitors Views 80

पत्र को हस्ताक्षर-पते सहित प्रधानमंत्री को भेजने का अनुरोध

मुम्बई।

भारत को इंडिया की अपेक्षा भारत नाम से ही पुकारे जाने के अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का बीड़ा उठाया गया है। खुद के हस्ताक्षर-पते सहित प्रधानमंत्री को ऐसे पत्र भेजने का अनुरोध किया गया है, ताकि भारत की प्रतिष्ठा कायम रहे।

प्रति,
नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री,भारत सरकार,
नई दिल्ली, भारत

विषय-भारत बने भारत अभियान।

महोदय,
सर्वविदित है कि संभवत विश्व में हमारा देश एकमात्र देश है जो दो अलग-अलग भाषा और लिपि में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। हिंदी देवनागरी लिपि में भारत,इंग्लिश रोमन लिपि तथा अन्य विदेशी भाषाओं और लिपियों में इंडिया। अन्य सभी देशों जैसे अमेरिका, जापान,जर्मनी,इटली और फ्रांस आदि का देशी या विदेशी विश्व की सभी भाषाओं में एक ही नाम है। इसी तरह भारत का भी विश्व की सभी भाषाओं में एक ही नाम होना चाहिए। सर्वविदित है कि भारत के अतिरिक्त हमारे देश के लिए अन्य सभी प्रचलित नाम विदेशी आक्रांताओं द्वारा अपने शासनकाल में स्थापित किए गए। हमने अंग्रेजों से आजादी पाई लेकिन अंग्रेजी और इंडिया से देश को आज तक आजाद नहीं करा पाए। भारत की स्थापना नहीं कर पाए। वर्तमान प्रचलित शिक्षा व्यवस्था के कारण भारत विलुप्त हो रहा है,इंडिया फल-फूल रहा है जिसका अर्थ है ऐसा देश जहां पिछड़े, ओल्ड फैशन्ड,अपराधिक प्रवृत्ति के लोग रहते हैं।
भारत का अर्थ है-तेजयुक्त,आभामय,तेजस्वी, चमकदार,दैदिप्यमान सूर्य।
इतने सुंदर अर्थमय नाम को भूलकर हम इंडिया जैसे अपमानजनक नाम को निरंतर अपने देश के लिए हर क्षेत्र में अपनाते चले जा रहे हैं। ऐसा होते देखना किसी भी देशभक्त नागरिक के लिए अत्यधिक खेदजनक है। अब हम आजाद हैं लेकिन अपने गौरवमयी,परंपरागत और स्वर्णिम इतिहास के प्रतीक भारत नाम की पुनर्स्थापना के बिना हमारी आजादी अपूर्ण है। अतः देश के लिए भारत नाम की पुनर्स्थापना हेतु हमने ‘भारत बने भारत’ अभियान प्रारंभ किया है। इसके तहत हमारा आपसे अनुरोध है कि-
* देश में,विदेश में भारतीय भाषाओं में या विदेशी भाषाओं में हमारे देश को भारत नाम से ही पहचाना जाए,इस हेतु आवश्यक कार्यवाही करें।
*भारतीय संविधान से इंडिया शब्द को विलुप्त किया जाए।
*सभी शासकीय-अशासकीय संस्थानों जैसे संसद के सदनों,विधानसभाओं और सभी शासकीय-अशासकीय कार्यालयों- न्यायालयों की समस्त कार्यवाहियों में भारतीय भाषाओं में या विदेशी भाषाओं में केवल एक ही नाम भारत को प्रचलित किया जाए।
*सभी भारतीय मुद्राओं,सभी डाक टिकटों,सभी पंजीयन मुद्राओं पर किसी भी भाषा और लिपि में भारत को भारत ही लिखा जाए,इंडिया नहीं।
* सभी शासकीय अशासकीय स्थान, संस्थान,जिनके नाम में इंडिया शब्द का प्रयोग हुआ है,उन्हें परिवर्तित कर सभी भाषाओं में भारत नाम प्रचलित किया जाए जैसे इंडिया गेट की जगह भारत द्वार,गेटवे ऑफ इंडिया की जगह भारत प्रवेश द्वार और पार्लियामेंट ऑफ़ इंडिया की जगह भारतीय संसद एवं इंडियन रेल की जगह भारतीय रेल।
*सभी शासकीय योजनाओं के नाम भी देसी और विदेशी भाषा में एक ही हों जैसे मेक इन इंडिया की जगह मेक इन भारत,मेड इन इंडिया की जगह मेड इन भारत,भारत में निर्मित,न्यू इंडिया की जगह नवभारत।
*भारतीय भाषाओं में से किसी एक भाषा को सर्वसम्मति से राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए।
*पूरे देश में शासकीय-अशासकीय सभी विद्यालयों-महाविद्यालयों में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक भारतीय भाषाओं में ही शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था हो।
आप के नेतृत्व में भारत की जनता इस गौरवमयी परिवर्तन की साक्षी बने,इस हेतु शीघ्र-अतिशीघ्र कार्यवाही करें।
निवेदक
एक भारतवासी
हस्ताक्षर-
नाम-
पता-
सम्पर्क क्रमांक-
(सौजन्य:वैश्विक हिन्दी सम्मेलन,मुम्बई)