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परिदृश्य

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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विशाखा ऑफिस के कार्य में व्यस्त थी। इस समय उसे एक बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य करना था। वह उसी प्रोजेक्ट कमेटी की हेड थी।
विशाखा हर कार्य बड़ी निपुणता से कर रही थी, ‘क्योंकि उसे हमेशा व्यवस्थित कार्य पसन्द था।
उसके कार्य से उसके बॉस बहुत खुश थे, लेकिन ऑफिस के कुछ पुराने कर्मचारियों को यह बात रास नहीं आ रही थी, क्योंकि पहले इस ऑफिस में किसी महिला ने अपने बल पर पूरा प्रोजेक्ट कार्य अकेले कभी नहीं किया था, जबकि विशाखा अपने हर कार्य में निपुण थी। उसने अपने इस प्रोजेक्ट को भी बड़े अच्छे ढंग से पूर्ण किया। विशाखा के कार्य की प्रबंधन ने बहुत प्रशंसा की।
उस दिन से ऑफिस का परिदृश्य बदल चुका था।पहले जो लोग विशाखा के साथ बैठकर गप्पे मारते थे, साथ में खाना खाते थे, अब उनका एक ग्रुप अलग बन गया था। अब उन सभी ने विशाखा से दूरी बना ली थी ।
विशाखा एक दिन अकेले लंच ले रही थी, तभी पुरानी गुप्ता मैडम ने आकर कहा-“आप अकेले खाना खा रही हो, मेरे साथ ले लिया करो।”
“नहीं, ऐसी कोई बात नहीं। बस ऐसे ही…।”
गुप्ता मैड़म बोली-“मैं समझती हूँ, यह परिदृश्य क्यों बदल गया, क्योंकि तुमने अनजाने में कहीं न कहीं पुरुषवादी सोच पर गहरी चोट जो की है, पर मैं खुश हूँ। कहीं से तो शुरुआत हुई। मैं कभी यह नहीं कर सकी। तुम कुछ मत सोचना, धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएंगे।” विशाखा के चेहरे पर मुस्कान फैल गई।

परिचय-डॉ. वंदना मिश्र का वर्तमान और स्थाई निवास मध्यप्रदेश के साहित्यिक जिले इन्दौर में है। उपनाम ‘मोहिनी’ से लेखन में सक्रिय डॉ. मिश्र की जन्म तारीख ४ अक्टूबर १९७२ और जन्म स्थान-भोपाल है। हिंदी का भाषा ज्ञान रखने वाली डॉ. मिश्र ने एम.ए. (हिन्दी),एम.फिल.(हिन्दी)व एम.एड.सहित पी-एच.डी. की शिक्षा ली है। आपका कार्य क्षेत्र-शिक्षण(नौकरी)है। लेखन विधा-कविता, लघुकथा और लेख है। आपकी रचनाओं का प्रकाशन कुछ पत्रिकाओं ओर समाचार पत्र में हुआ है। इनको ‘श्रेष्ठ शिक्षक’ सम्मान मिला है। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। लेखनी का उद्देश्य-समाज की वर्तमान पृष्ठभूमि पर लिखना और समझना है। अम्रता प्रीतम को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाली ‘मोहिनी’ के प्रेरणापुंज-कृष्ण हैं। आपकी विशेषज्ञता-दूसरों को मदद करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिन्दी की पताका पूरे विश्व में लहराए।” डॉ. मिश्र का जीवन लक्ष्य-अच्छी पुस्तकें लिखना है।