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पिता सम्मान अपना

ममता तिवारी
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष…..

है पिता के नाम से गुमान अभिमान मान अपना है,
भूले से कर नहीं अपमान,छाँव आसमान अपना है
ये बचपन कभी जाता नहीं,कोई चिंता नहीं होती,
ले सिर अपनी बला सारी,पिता सम्मान अपना है।

दिनभर कमा आते श्रम चूर,गिरता पसीना माथे पर,
घिरे स्वयं परेशानी भंवर,पूत देख खिले बाँछे पर
पुस्तक फीस दवाई राशन,छुपाए क्या-क्या पसीने में,
वो पूरे शौक करे हरदम,उठाये अरमान कांधे पर।

ऐसा एक हाथ जमाने में,वरद मुद्रा सदा रहता है,
जो कंधे पर कभी बिठाता,वो घुटनन फिदा चलता है।
पिता प्रेम और पसीने की,हम कीमत दे नहीं सकते,
औलाद पर लुटा तन मन धन,फ़र्ज़ अदा वो करता है।

होते औलाद के भी फर्ज,कई यही भूल जाते हैं,
हममें समझे नहीं कभी बोझ,पिता से जीवन पाते हैं।
बुढ़ापे अकेले छोड़ना ना,समय यही दोहराता है,
जो बोते हम वही लगे फल,ये जीवन फूल-काँटे हैं॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।

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