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प्रगति रोकना है परिवर्तन ना स्वीकारना

अलका जैन
इंदौर(मध्यप्रदेश)

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जीवन का पहला सबक होना चाहिए परिवर्तन में आस्था काl यह बुनियादी पाठ है। न काम पर काबू से का न कोध पर काबू पाने का,जीवन का धर्म होना चाहिए,परिवर्तन में अटूट आस्था का। हालांकि,परिवर्तन को मन कभी सहज रुप से स्वीकार नहीं करता हैl मन भागता है परिवर्तन से दूर,परे,जबकि जिंदगी बसती है परिवर्तन में। जीवन की शाश्विकता इसी में निहित है। विडम्बना ये है कि हमारी जिंदगानी ओर मन प्रतियाोगी की भांति पेश आते हैं। जब बच्चा माँ के पेट से बाहर आता है तब रोता है क्यों ? क्या कि बच्चों को परिवर्तन रास नहीं आता। मन रमता है माँ के उदर में,जहां उसे किसी बात की चिंता नहीं। उदर में आराम ही आराम है, परम सुख है,किन्तु जिंदगी उसे माँ के पेट से बाहर फेंक देती है। अब मन चाहने लगता है माँ की गोद। तब जिंदगी उसे विवश करती है माँ की गोद छोड़ने को। मन करता है माँ गोद ले ले,जिंदगी कहती है अब अपने पैरों पर खड़ा हो। मन बचपन,खेल में बहुत रमता है। तब जीवन हमें जवानी की तरफ मोड़ देता है। जवानी में मन कहीं बहलता ही नहीं है। जैसे-तैसे मन कहीं से खोज कर मन का मीत लाता है,तब कहीं जाकर मन को राहत मिलती है। अभी दो-चार घड़ी सुख की साँस ली नहीं कि जिंदगी फिर खुराफात करती है,बुढ़ापे से मिलवा देती है। तब भी मन हठ नहीं छोड़ता, पुराने दिन की जुगाली करता रहता है। मन बसता है अतीत में,पर जीवन भागता है परिवर्तन की ओर। मन और परिवर्तन की यह रस्साकशी चलती रहती है। जीवन में वही आदमी बुलंदी पर पहुंचता है,जो परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है।
जीवन की पहली मांग है परिवर्तित में आस्थाl जीवन में देखें कि कहां परिवर्तन हो सकता है,कहां इसकी जरूरत हैl आहिस्ता-आहिस्ता ही सही परिवर्तन लाते रहिए। परिवर्तन मानव सभ्यता की बुनियाद है। इसे स्वीकार करो। समाज में परिवर्तन लाएं। विचारों में परिवर्तन लाएं।
परिवर्तन ना स्वीकारना प्रगति रोकना है।

परिचय-अलका जैन का निवास इंदौर(मध्यप्रदेश) में हैl इनकी जन्म तिथि ८ अक्तूबर १९५७ और जन्म स्थान धार(मप्र) हैl स्थाई रूप से शहर इंदौर में सी बसी हुई अलका जैन का कार्यक्षेत्र भी इंदौर ही हैl आप सामाजिक गतिविधियों के अन्तरगत विधवा विवाह करवाने,हास्य-कवि सम्मेलन,नृत्य कला आदि में सक्रिय रहती हैंl आप काव्य सहित विभिन्न विधाओं में लेखन करती हैंl १९८० से सतत लिखने में सक्रिय अलका जैन को हिन्दी भाषा का ज्ञान हैl प्रकाशन में उपन्यास-पामेला है तो रचनाओं का प्रकाशन लेख,ग़ज़ल,गीत,कहानी आदि के रूप में पत्र पत्रिकाओं में हुआ हैl इनके खाते में सम्मान के रूप में श्रीलाल शुक्ल स्मारक राष्ट्रीय संगोष्ठी समिति(हैदराबाद) से मान सहित मालवा रत्न, गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड और विभिन्न संगठनों द्वारा सम्मान आदि हैl इनकी विशेष उपलब्धि हास्य का पुरस्कार मिलना हैl लेखनी का उद्देश्य-समय का सदुपयोग करना हैl प्रेरणा -कबीर दास जी हैंl रूचि नृत्य,सत्संग,फैशन,मुशायरे में शिरकत और लेखन हैl

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