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प्रेम दिवस कैसे मनाऊँ…!

डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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कटे पड़े थे अंग जमीं पर,
तड़प रहे थे वीर हमारे
लाल हुई थी माटी सन के,
बहे लहू के अविरल धारे
इतनी चीखें इतनी आहें,
गीत प्यार के कैसे गाऊँ
ये प्रेम दिवस कैसे मनाऊँ…!

नहीं बहाना कभी तू आँसू,
लौटकर आऊँगा मैं बहना
राखी के धागों की कसमें,
बिल्कुल नहीं उदास रहना
टूट गए बहना के सपने,
अब टीका किसको लगाऊं
ये प्रेम दिवस कैसे मनाऊँ…!

छिटक गया सिंदूर मांग का,
चटक गयीं हाथ की चूड़ी
सूख गए आँखों के आँसू,
माँ धरती पर पड़ी है बूढ़ी
घर-भर में घनघोर अँधेरा
किस मुँह से मैं दीप जलाऊँ,
ये प्रेम दिवस कैसे मनाऊँ…!

नन्हा-सा बेटा राह देखता,
पापा तुम जल्दी से आना
याद है मेरा जन्मदिन है,
नहीं चलेगा कोई बहाना।
उसके भोले मुखड़े पर मैं,
कैसे झूठी मुस्कान सजाऊँ
ये प्रेम दिवस कैसे मनाऊँ…!!

परिचय– डॉ. अनिल कुमार बाजपेयी ने एम.एस-सी. सहित डी.एस-सी. एवं पी-एच.डी. की उपाधि हासिल की है। आपकी जन्म तारीख २५ अक्टूबर १९५८ है। अनेक वैज्ञानिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित डॉ. बाजपेयी का स्थाई बसेरा जबलपुर (मप्र) में बसेरा है। आपको हिंदी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। इनका कार्यक्षेत्र-शासकीय विज्ञान महाविद्यालय (जबलपुर) में नौकरी (प्राध्यापक) है। इनकी लेखन विधा-काव्य और आलेख है।

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