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फर्क

सुषमा दुबे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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बेटी के साथ हुई ज्यादती की रिपोर्ट लिखवाने पहुंचे पिता-पुत्री से थानेदार ने उल-जुलूल प्रश्न करना शुरू कर दिए। लड़की का पिता ने कई सवालों के जवाब में सिर झुका लिया। फिर शुरू हुआ प्रवचन का सिलसिला, “अरे आजकल की लड़कियां मौज- मस्ती के लिए लड़कों से दोस्ती करती हैं,जब बात नहीं बनती इल्जाम लगा देती है………..” कहकर एक लम्बा-चौड़ा लेक्चर दे दिया।
दोनों बाप-बेटी सर झुकाये उसकी बातें सुनते रहे। तभी थानेदार लड़की के पिता की और मुखातिब होकर बोला-“धिक्कार है तुम्हें जो ऐसी बेटी को जन्म दिया। इसकी जगह यदि मेरी बेटी होती तो तो मैं पुलिस थाने में आने की जगह उसे आग लगा कर ख़त्म कर देता।”
अब तक चुपचाप सुनती रही लड़की ने मुँह खोला,वह थानेदार से बोली-“सर,एक बात पूछूँ ?”
“हाँ-हाँ पूछl”
“आपने तो कह दिया कि,आपकी बेटी ऐसा काम करती तो आप उसे ख़त्म कर देतेl”
“और नहीं तो क्या आरती उतारता उसकी ?”
“लेकिन,सर अगर उस लड़के की जगह आपका बेटा होता,तब भी ऐसा ही करते आप ?”
अब सिर नीचा करने की बारी थानेदार की थी।