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बच्‍चों की प्रतिरोधकता के लिए तैयार खाद्य पदार्थ हानिकारक

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के साथ ही तीसरी लहर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। चिकित्सकों का मानना है कि इस लहर में बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इनका कहना है कि सबसे ज्यादा खतरा बच्चों को है। संक्रमण के बढ़ते खतरे और टीका का उपलब्ध ना होना बच्चों के प्रतिरोधी तंत्र का ध्यान रखने के लिए हमें मजबूर कर देता है। प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत करने में सबसे आसान तरीकों में से एक है कि माता-पिता बच्‍चों की थाली में पौष्टिक आहार शामिल करें। एक अच्छा आहार आहार बच्चे के विकास से लेकर सेहत पर असर डालता है।
बच्चों में प्रतिरोधकता बढ़ाने के लिए कोशिश करें कि,कम से कम एक मौसमी और एक स्थानीय फल भोजन में जरूर शामिल करें। उन्हें यह पसंद नहीं है तो मजबूर न करें,पर कोशिश करें कि वह इसका एक टुकड़ा जरूर खाएं। इससे पेट में अच्छे जीवाणु का विकास होगा,जिससे बच्चे का प्रतिरोधी तंत्र बेहतर बनेगा।
हर किसी के लिए शाम ४ से ६ बजे के बीच कुछ पौष्टिक खाना बेहद ज़रूरी है। कुछ मीठा और सादा भोजन जैसे रोटी,घी और गुड़ का रोल या सूजी का हलवा या रागी के लड्डू देने से उन्हें ऊर्जावान रहने में मदद मिल सकती है। यह उनके समग्र स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा का ख्याल रखता है।
पाचन करने में आसान और स्वादिष्ट चावल बच्चों के भोजन में शामिल करना बेहद जरूरी है। चावल प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है। चावल में कई पोषक तत्व होते हैं,जिसमें सबसे ज्यादा अहम है हर तरह के एमिनो अम्ल का होना। ऐसे ही बच्चों को रोजाना घर का बना अचार-चटनी या मुरब्बा दें। ये सहायक भोजन उनके पेट के अच्छे जीवाणु को पनपने में मदद करेंगे,उनकी प्रतिरोधकता को मजबूत करेंगे और उन्हें खुश रहने में मदद करेंगे।
खास बात ये कि,इनके सोने के समय को नजरअंदाज करना सीधे तौर पर प्रतिरोधकता पर असर डाल सकता है। अच्‍छी नींद हमारे प्रतिरोधी तंत्र और सेहत को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। यह मोटापे के जोखिम और जंक फ़ूड के लगाव को भी कम करती है।
सभी प्रकार के बने बनाए या जंक फूड से अपने बच्‍चे को बचाएं। ये खाद्य पौष्टिक पदार्थ ट्रांस फैट से भरे होते हैं और इनमें कम पौष्टिक तत्व होते हैं। यह अक्सर वजन बढ़ाते हैं और शरीर को पोषण नहीं देते।
शारीरिक क्रिया-कलाप और सक्रिय रहना जीवन शैली की एक और महत्वपूर्ण आदत है,जो आपको तंदुरुस्त और सक्रिय रहने में मदद करती है। व्यायाम या ध्यान करने से मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा मिलता है, इसलिए बच्‍चों को घर के छोटे-मोटे कामों में लगा देना चाहिए,जिससे वह सक्रिय रहें।
आपको बच्‍चों को बने बनाए खाद्य पदार्थों की बजाय स्वास्थवर्धक खाद्य खिलाने की कोशिश करनी चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे करी पत्ता,सहजन,धनिया और पालक बच्‍चों के खाने में जरूर होना चाहिए। इनमें फाइबर,खनिज पदार्थ, आयरन और जिंक खूब होता है। ऐसे ही दही प्रोबायोटिक्‍स और विटामिन बी १२ से प्रचुर होता है,जो पेट में गंदे जीवाणु को पनपने से रोकता है और प्रतिरोधकता को बढ़ाने का काम करता है।
बच्‍चों को बहुत ज्‍यादा शुगर (फल का रस,चॉकलेट आदि)नहीं खिलानी चाहिए,क्‍योंकि इससे बच्‍चों की प्रतिरोधकता प्रभावित हो सकती है।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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