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बदलता परिवेश

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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रीति-रिवाज तीज त्यौहार, पहनावा कितनी बातें,
बदल डाले नए परिवेश ने, ऐसे ही हँसते-गाते।

औसत गर्म देश यह भारत, जीन्स-कोट पहने टाई,
सूती खादी रख सिंथेटिक, जाने कैसे हैं भाते।

मोमो पिज्जा चाऊ खाऊ, बच्चे अब के है सारे,
शहर फ्लैट कल्चर ने लूटे, हम सबसे रिश्ते-नाते।

जल्दी सोना-जल्दी उठना, यह गुण था अच्छा खासा,
देर सोना दिन चढ़े उठकर, रौब अब जमाए जाते।

संस्कार-संस्कृति सब भूले चक्कर में अंग्रेजी के,
रहे इधर के-न ही उधर के, दो नावों फंसे लाते।

फैशन कह कर कुछ भी चलता, बदतमीज है औलादें,
कुछ बचे कुछ है धराशायी, अब मर्यादा के हाते।

बेगढ़ नई राह है जाते, बने बंद कर के बैठे,
मन छटपटाता-तिलमिलाता, बदले में मिलती घातें॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।