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बरखा आई

जबरा राम कंडारा
जालौर (राजस्थान)
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बरखा आई, बरखा आई,
सबके ही मन को भाई।

उमड़-घुमड़ बादल छाए,
नीलगगन में गर्जन गाए
ठंडी-ठंडी हवा सुहाई,
बरखा आई, बरखा आई।

खुश बच्चे लगते सारे,
उछल-कूद करते प्यारे।
बड़े-बूढ़े मन में हरषाई,
बरखा आई, बरखा आई।

बूंदा-बांदी लगती होने,
हलधर चले बीज बोने।
चला ट्रैक्टर करे खड़ाई,
बरखा आई, बरखा आई॥

ताल-तलैया भरता पानी,
खग बोलते मधुर बानी।
चहुंओर खुशहाली छाई,
बरखा आई, बरखा आई॥