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बस में होता मनुष्य के…

संदीप धीमान 
चमोली (उत्तराखंड)
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माँ अनमोल रिश्ता (मातृ दिवस विशेष) …

बस में होता मनुष्य के
तो शाश्वत मिटा देता,
प्रकृति को मिटाने वाला
माँ को भी भुला देता।

जननी, तरणी शब्द माँ
अवरोध सारे हटा देता,
प्रकृति को मिटाने वाला
अर्थ माँ का भुला देता।

बस में होता मनुष्य के
सत्य, झूठा बता देता,
प्रकृति को मिटाने वाला
व्यर्थ माँ को बता देता।

नारी ही नहीं अकेली माँ
जगत जीवों में वो जग जहां,
अंकुरित बीज भी कहते धरती को
मातृत्व तुझे प्रणाम यहां।

शब्द माँ अर्थ जननी का,
मुक्ति को वैतरणी का।
प्रकृति को मिटाने वाला,
अस्तित्व खुद का कैसे भुला देता!!

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