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बारिश में स्वास्थ्य के लिए रहें सावधान

गोवर्धन दास बिन्नाणी ‘राजा बाबू’
बीकानेर(राजस्थान)
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हम बहुत से वरिष्ठजन नियमित रूप से शाम के समय मैदान में बैठ आपस में किसी भी विषय पर बातचीत करते आ रहे हैं। इस बार बरसात के मौसम में मैदान में उपस्थिति कम होने के कारण पर जब चर्चा करने लगे, तब उपस्थित सभी का यह मानना था कि हमें अपनी उम्र को ध्यान में रखते हुए इस मौसम में सावधानी तो बरतनी ही चाहिए। इस तरह जो विमर्श उभरा, वह इस प्रकार रहा-
-वर्षा ऋतु में आहार-विहार में बड़ी सावधानी रखना आवश्यक है, ताकि और पित्त बिगड़े नहीं।
-खान-पान में यह ध्यान रखना अति आवश्यक है कि, जब तक पहले खाया हुआ भोजन ठीक से पच न जाये, तब तक पुनः भोजन नहीं करें।
-बरसात के मौसम में आराम से पच जाने वाले खाद्य पदार्थ ही लेना स्वास्थ्यकर रहता है।
-जूते पहने बिना नंगे पैर इकठ्ठे पानी में हो या कीचड़-गीली मिट्टी में नहीं चलना है।
-गीले कपड़े भी नहीं पहनना है अर्थात सूखे कपड़े पहनने को प्राथमिकता दें।
-रहने वाली जगह सीलन मुक्त हो।
-वर्षा ऋतु में दोपहर में नींद लेना भी उचित नहीं रहता।
-वर्षा ऋतु में अत्यधिक मेहनत-परिश्रम भी करना मना है।
-ज्यादा देर तक धूप भी सेवन नहीं करें।
-ओस में भी ज्यादा देर तक नहीं रहना है यह ध्यान रखें।
-वर्षा ऋतु में बिल्कुल साफ पानी ही पीने में प्रयोग में लें।
-वर्षा ऋतु में नदी-तालाब वगैरह में नहाना नहीं है, क्योंकि इनमें ऋतु-जन्य, परिस्थिति-जन्य एवं पर्यावरण-जन्य प्रदूषणकारी-संक्रमणकारी तत्व मिलेंगे ही।
-ठण्डा पानी भी नहीं पीएंगे तो अति उत्तम रहेगा।
-छाछ, मठ्ठा या सत्तू का घोल भी नहीं पीना ही श्रेयस्कर रहेगा।
-बारिश में शुद्ध, ताजा गर्म-शाकाहारी भोजन ही करें।
सभी का यह मत रहा कि, अनुपस्थित साथियों का हालचाल भी फोन पर जानते रहना है और मामूली बीमारी में भी अपनों के बीच शामिल होने के लिए प्रेरित करना है।