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बिना रोशनी अंधकार

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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रोशनी से जिन्दगी…

सादर नमन है आपको हे शुभ शुभम हे ज्योति,
आपके शुभ ज्योति, रोशनी से जिन्दगी है मिलती।

विवश रहता है मानव, रोशनी जब तक नहीं मिलती है,
मानव का जिन्दगी और रास्ता यह दोनों रूक जाती है।

रोशनी से जिन्दगी है, बिना रोशनी दुनिया है अन्धकार,
दिन या रात हो, रोशनी से कार्य करते हैं हज़ारों-हज़ार।

ज़िन्दगी का नाम है रोशनी, रोशनी है तो है जिंदगी,
मित्रता है रोशनी और जिन्दगी की रोशनी कहो या जिन्दगी।

नेत्र की रोशनी हो या सूर्य की, या जगमग जलता दीप,
जीने के लिए,कदम बढ़ाने के लिए, सदा जलता है दीप।

रोशनी देव-देवालय मन्दिर में, जरूरत है सारे जहान को,
घर की गृहिणी संध्या दीप से, खुश करती भगवान को।

अन्तर्मन या चारों धाम, हर जगह रोशनी का है काम,
पर्व,त्योहार या जगमगाते दीपों का, दिवाली हो नाम।

पुण्य वसुन्धरा की, चन्दन जैसी माटी से दीप बना लो,
मिट्टी के दीप से उज्जवल भविष्य की, राह अपना लो॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |

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