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बेस्ट फ्रेंड

वन्दना पुणताम्बेकर
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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८ साल का चीनू अक्सर गर्मी की छुट्टियों में अपने दादाजी के यहां रहने आता। दादाजी तो मानो उसके बेस्ट फ्रेंड हैं,उन्हें भी बड़ी बेसब्री से चीनू का इंतजार रहता। दादाजी फौज में अफसर थे,तो पॉश कॉलोनी में उनका बड़ा-सा मकान था। चीनू अपनी माँ के साथ एक छोटे-से शहर में रहता था। जबसे चीनू समझदार हुआ,तबसे उसने पापा को नहीं देखा था। बस दीवार पर लगी फौज की वर्दी में पापा की तस्वीर ही देखी थी। आज भी वह दादाजी के यहाँ छुट्टियां बिताने आया था। दादाजी के साथ वह हमेशा तैराकी करने जाता। दादाजी ने बड़े प्यार से उसे तैरना सिखाया था। इस बार वह दादाजी को जिद्द कर रहा था कि हम तैराकी करने जाएंगे। दादाजी की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण दादाजी ने उसे मना कर दिया। गुस्से से मुँह फुलाकर चीनू बाथरूम में गया और वहां टब में पानी भरकर देर तक नहाता रहा एवं सारा पानी गंदा करता रहा। दादाजी ने देखा तो बोले,-“बेटा पानी को इस तरह बर्बाद मत करो,पानी खत्म हो गया तो कल कैसे नहाओगे।” चीनू गुस्से से बोला,-“मुझे स्विमिंग करनी है,आप मुझे नहीं ले जाते तो मैं यही स्विमिंग करूंगा। स्विमिंग पूल में कितना पानी भरा रहता है। वह लोग भी तो इतना सारा पानी फेंक देते हैं ना!” तब दादाजी बोले,-“बेटा स्विमिंग पूल के पानी को फिल्टर किया जाता है। उसे फेंका नहीं जाता। उसमें क्लोरीन डालकर फिर से उसे साफ किया जाता है।

यह सुनकर चीनू को अपने पानी बहाने पर शर्मिंदगी महसूस हुई। उसने आज स्विमिंग पुल की स्वच्छता के बारे में दादाजी से जानकारी प्राप्त की और साथ-साथ दादाजी को पानी बचाने का वादा किया। फिर शाम को पार्क में जाकर आइसक्रीम खाने का दादाजी से वादा लिया। उसकी इन सब बातों से खुश होकर दादाजी ने बेस्ट फ्रेंड से हाथ मिलाते हुए वादा पूरा करने का वादा किया।

परिचय: वन्दना पुणतांबेकर का स्थाई निवास मध्यप्रदेश के इंदौर में है। इनका जन्म स्थान ग्वालियर(म.प्र.)और जन्म तारीख ५ सितम्बर १९७० है। इंदौर जिला निवासी वंदना जी की शिक्षा-एम.ए.(समाज शास्त्र),फैशन डिजाईनिंग और आई म्यूज-सितार है। आप कार्यक्षेत्र में गृहिणी हैं। सामाजिक गतिविधियों के निमित्त आप सेवाभारती से जुड़ी हैं। लेखन विधा-कहानी,हायकु तथा कविता है। अखबारों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं,जिसमें बड़ी कहानियां सहित लघुकथाएं भी शामिल हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-रचनात्मक लेखन कार्य में रुचि एवं भावनात्मक कहानियों से महिला मन की व्यथा को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास है। प्रेरणा पुंज के रुप में मुंशी प्रेमचंद जी ओर महादेवी वर्मा हैं। इनकी अभिरुचि-गायन व लेखन में है।