भोपाल (मप्र)।
अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा काव्य चौपाल की मासिक गोष्ठी १२ सितंबर को प्रीत एक्या फाउंडेशन महाकाली सोसाइटी में आयोजित की गई।
इसमें शहर की कवयित्रियों ने भक्ति और श्रृंगार रस की कविताओं से माहौल को रसमय बनाया।
आयोजन में वरिष्ठ कवयित्री जया आर्य ने कविता ‘नहीं हूँ अब मैं साथ तुम्हारे शायद सदा तुम्हारी बनकर, पर रहूं मैं आगे पीछे, मत करना आजाद मुझे।’ सुनाकर तालियां बटोरी, तो नीता श्रीवास्तव ने ‘रामायण का ज्ञान है, मर्यादा सियाराम हैं’ और डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव ने अंतर्मन की वेदना को व्यक्त किया। मंच अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने ‘मैं बांस के जंगलों का वह बांस होना चाहती हूँ, जिससे बनी थी कृष्ण की बांसुरी…’ सुना कर मोहित किया। डॉ. क्षमा पांडेय, विनीता राहुरीकर, सरोज लता सोनी तथा जया केतकी आदि ने स्त्री विमर्श की कविता सुनाकर माहौल को विमर्श, श्रृंगार और भक्ति के रस से सराबोर कर दिया।
संचालन विनीता राहुरीकर ने किया।