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मन और वाणी की मधुरता अपनाएँ

मुकेश कुमार मोदी
बीकानेर (राजस्थान)
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अक्सर हम किसी से प्रथम बार मिलने पर वाणी की मधुरता द्वारा एक-दूसरे को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। अपने पुत्र या पुत्री के लिए कहीं रिश्ता जोड़ना हो, व्यापारिक समझौते करने हो, कहीं नौकरी का साक्षात्कार देना हो या अन्य कोई प्रयोजन हो, वाणी की यह औपचारिक मधुरता केवल सामने वाले व्यक्ति से होने वाले सम्भावित लाभ को ध्यान में रखते हुए अपनाई जाती है। यदि मन में नकारात्मकता, कड़वाहट, दुर्भावना और स्वार्थ भरे भाव जागृत हो तो निश्चित रूप से ऐसी मधुरता में कहीं ना कहीं बनावटीपन और निजी हित झलक ही जाता है जो हमारे बनते हुए रिश्तों, व्यापारिक समझौतों या नौकरी मिलने की सम्भावना को वास्तविकता में बदलने नहीं देता।
इसलिए, बातचीत चाहे औपचारिक हो या प्रयोजनार्थ, दोनों ही स्थितियों में नैसर्गिक मधुरता का सिद्धान्त सार्वभौमिक रूप से लागू होता है। ऐसा तभी सम्भव है जब हमारा मन आन्तरिक रूप से स्वच्छ, निर्मल, सकारात्मक और मधुर हो। मन की आन्तरिक मधुरता द्वारा ही हमारी अभिव्यक्ति लोगों को आकर्षित करके उनसे स्थाई रूप से जोड़ने में सक्षम है। यही आन्तरिक मधुरता हमारे व्यक्तित्व को निखारती है, सम्बन्धों को प्रगाढ़ करती है और निरन्तर एक अनूठी ताजगी का अनुभव कराते हुए हमारे जीवन को सुन्दर बनाती है। जीवन को आध्यात्मिक और नैतिक रूप से हमारे मन की नैसर्गिक मधुरता ही पोषित करती है।
जब हम अपने मन को मधुर रखने में सक्षम हो जाते हैं, अर्थात किसी भी कड़वाहट या दुर्भावना से मुक्त हो जाते हैं, तभी जीवन की वास्तविक सुन्दरता का अनुभव करने में सक्षम होते हैं। मन को सकारात्मक भावों का पोषण मिलने से जीवन में दु:ख या नकारात्मकता की कोई लहर नहीं रहती और हम निरन्तर विकास के पथ पर अग्रसर होते हैं।
इसलिए, जीवन में मधुरता के महत्व को समझकर निरन्तर मन को शुद्ध विचारों से, शुद्ध भावों से और शुद्ध भावनाओं से भरपूर करते रहें।

परिचय – मुकेश कुमार मोदी का स्थाई निवास बीकानेर में है। १६ दिसम्बर १९७३ को संगरिया (राजस्थान)में जन्मे मुकेश मोदी को हिंदी व अंग्रेजी भाषा क़ा ज्ञान है। कला के राज्य राजस्थान के वासी श्री मोदी की पूर्ण शिक्षा स्नातक(वाणिज्य) है। आप सत्र न्यायालय में प्रस्तुतकार के पद पर कार्यरत होकर कविता लेखन से अपनी भावना अभिव्यक्त करते हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-शब्दांचल राजस्थान की आभासी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त करना है। वेबसाइट पर १०० से अधिक कविताएं प्रदर्शित होने पर सम्मान भी मिला है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-समाज में नैतिक और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास करना है। ब्रह्मकुमारीज से प्राप्त आध्यात्मिक शिक्षा आपकी प्रेरणा है, जबकि विशेषज्ञता-हिन्दी टंकण करना है। आपका जीवन लक्ष्य-समाज में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों की जागृति लाना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-‘हिन्दी एक अतुलनीय, सुमधुर, भावपूर्ण, आध्यात्मिक, सरल और सभ्य भाषा है।’

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