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ममतामयी ऐसी मेरी वसुंधरा

सुबोध कुमार शर्मा 
शेरकोट(उत्तराखण्ड)

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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


जिसका आँचल है रत्नों से भरा,
ममतामयी ऐसी मेरी वसुंधरा।

ऋण तेरा कैसे चुकायेंगे हम,
सौंदर्य वरदान है तुमने दिया।
नियम क्या तेरा सदा अपनाएंगे,
तभी तो रहता जीवन दुःखों भराl
ममतामयी ऐसी मेरी…ll

सहनशीलता धरती माँ तेरी महा,
वक्ष रहता सदा फूल शूलों से भरा।
पाप-पुण्य का न देती ध्यान तू,
जीवन उपहार समर्पित करती सदा।
अंतरिक्ष में भी मसनव चला गया,
तव बिन मानव को है ठौर कहाँ
आओ सजाएं-सँवारे यह पवन धरा।
ममतामयी ऐसी मेरी…ll

पुष्पमणि परिधान से सजती धरा,
मलयगिरि की मलयानिल सँवारती।
नवीनतम उपकरणों की पीड़ा-सह,
क्षुधितों की क्षुधा अन्न दे दुलारतीl
उर है रहता सदा तेरा ज्वाला भरा,
ममतामयी ऐसी मेरी…ll

धरा दिवस जग में सभी मना रहे,
मन में सब जन अतीव हर्षा रहे।
क्यों मना रहे सभी धरा दिवस,
रोज क्यों न हैं इसको मना रहेl
पूजित वन्दित है बहु हर क्षण,
क्यों अधूरा है हमारा समर्पणl
निज सुकर्मों से करें हम इसको हरा,
ममतामयी ऐसी मेरी…वसुंधराll

परिचय – सुबोध कुमार शर्मा का साहित्यिक उपनाम-सुबोध है। शेरकोट बिजनौर में १ जनवरी १९५४ में जन्मे हैं। वर्तमान और स्थाई निवास शेरकोटी गदरपुर ऊधमसिंह नगर उत्तराखण्ड है। आपकी शिक्षा एम.ए.(हिंदी-अँग्रेजी)है।  महाविद्यालय में बतौर अँग्रेजी प्रवक्ता आपका कार्यक्षेत्र है। आप साहित्यिक गतिविधि के अन्तर्गत कुछ साहित्यिक संस्थाओं के संरक्षक हैं,साथ ही काव्य गोष्ठी व कवि सम्मेलन कराते हैं। इनकी  लेखन विधा गीत एवं ग़ज़ल है। आपको काव्य प्रतिभा सम्मान व अन्य मिले हैं। श्री शर्मा के लेखन का उद्देश्य-साहित्यिक अभिरुचि है। आपके लिए प्रेरणा पुंज पूज्य पिताश्री हैं।