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महिलाओं को अधिकारों का ठीक से दायित्व निभाना होगा

प्रभावती श.शाखापुरे
दांडेली(कर्नाटक)
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‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ स्पर्धा विशेष…………………

८ मार्च २०१९ को दुनिया भर में १०६ वां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा। वैसे तो महिला दिवस का इतिहास बड़ा ही विस्तृत है। सबसे पहले १९०९ में संयुक्त राष्ट्र संघ ने यह दिवस मनाया था। यह दिवस मनाने का उद्देश्य यह था कि महिलाओं को भी मत देने का अधिकार प्राप्त हो। सामाजिक अधिकारों को लागू कराने की इनकी मांग थी। इतना ही नहीं,२३ फरवरी १९१७ में रूस की महिलाओं ने रोटी और शांति की माँग की थी। यह तारीख जुलियन कैलेन्डर के मुताबिक थी,परंतु ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार वह दिन ८ मार्च था। दुनियाभर में इसी कैलेंडर का उपयोग होता था,इसलिए आज भी महिला दिवस ८ मार्च को ही मनाया जाता है।
अगर हम भारत देश की बात करते हैं तो महिला दिवस मनाना किस हद तक सफल हो पाया है,यह एक प्रश्न है ? भारत एक ऐसा देश है जहाँ हमें विविधता में एकता मिलती है,और इसी के अनुरूप अलग-अलग धर्मों में नारी की स्थिति भी अलग-अलग है। भारत देश में नारी का स्थान हर युग में बदलता गया है। वैदिक काल में स्त्री को देवी का दर्जा प्राप्त था। उसकी पूजा की जाती थी। कालांतर में भारत में अनेक युद्ध और आक्रमण होने लगे,चाहे वो ब्रिटिश हो या मुगलl इन सबका प्रभाव नारी जीवन पर भी पड़ा। मध्यकालीन युग में मुगल और अनेक राजा-महाराजा स्त्री को केवल भोग-विलास का साधन समझने लगे। शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से उस पर अत्याचार होने लगा। वह घर की चारदीवारी में बंद हो गई। पुरुष प्रधान समाज उसे हमेशा अपनी पैर की जूती समझने लगा था। बाल विवाह,सती,पर्दा प्रथा,अंधविश्वास आदि कुप्रथाओं की उपज इस युग में होने लगी थी,जिसकी वजह से स्त्री का जीवन त्रासदीपूर्ण हो गया। मध्यकालीन स्त्रियों की दयनीय दशा देखकर मैथिलीशरण गुप्त जी की यह पंक्तियाँ याद आती है-
“अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी,
आँचल में है दूध और आँखों में पानी।”
वर्तमान स्थिति में नारी का परिचय दें तो वह साहसपूर्ण है। आज महिलाओं को हम देखें तो हर एक क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। सभी कार्यालयों एवं दफ्तरों में वह पदासीन है। अपने को मिले अधिकारों का उसने बखूबी उपयोग कर अपना,अपने परिवार का और अपने देश का मान बढ़ाया है। रणभूमि में रानी लक्ष्मीबाई,वीरांगना चन्नम्मा,साहित्य के सागर में महादेवी वर्मा,कृष्णा सोबती,सुभद्रा कुमारी चौहान सहित आदि देश का कुशल नेतृत्व करती इंदिरा,प्रथम आइपीएस अधिकारी किरण बेदी,समाजसेवा में कुशल निर्वहन करती मदर टेरेसा,विज्ञान में कल्पना चावला,अवनी चतुर्वेदी, सुनीता विलियम्स आदि आकाश की ऊँचाइयों को छूकर नारी सामर्थ्य को ऊँचाई तक ले गईl इतना ही नहीं,खेलों की दुनिया में मेरी कॉम,पी.वी. सिंधु,सानिया मिर्जा आदि ने भारत का नाम रोशन किया है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रियंका चोपड़ा,सुष्मिता सेन आदि ने गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त कराया है। महिलायें अपना आसमान खुद तलाश रही हैं। उसे सफलता भी मिल रही है,पर यह बात सभी वर्गों की महिलाओं पर लागू नहीं होती है। मन में प्रश्न यह उठता है कि,क्या सच में आज महिला समाज में सशक्त है ? क्या उसका संघर्ष खत्म हुआ है ? साल का एक दिन हम महिला दिवस मनाते हैं,बाकी के ३६४ दिन शायद पुरुषों के लिए ही है। यहाँ पर भेद किया जाता है,इसलिए पुरुष कभी अपने सम्मान के लिए कोई दिन मनाना नहीं चाहता।
महिलाएँ जब मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त और सक्षम होंगी, रात के सन्नाटे में भी वह अपने-आपको सुरक्षित समझने लगेगी, दहेज के लालच में उसे जलाया नहीं जायेगा,कामकाज की जगह,घर में यहाँ तक कि सड़क पर उसका शोषण नहीं होगा,समाज जब नारी को भोग-विलास की नजर से न देखते हुए सम्मान की नजर से देखेगा,वह दिन सच में महिला का दिन कहकर हम खुशी से मना सकते हैं।
इतना ही नहीं,जहाँ हम महिलाओं का गुणगान करते हैं,वहीं दूसरी ओर इसी समाज में कुछ ऐसी महिलाएँ हैं,जो अपने कर्तव्य से मुँह मोड़ती है। आतंकवादी संगठनों से मिलकर गुप्तचर का काम करती हैं,जिस कार्यालय में काम करती है वहाँ भी अपना दायित्व नहीं निभातीl यहाँ तक कि महिला जो एक माता,बहन,पत्नी,बेटी का रूप होती है,वह अपने परिवार को रोशनी बनने के बावजूद अंधकार की ओर ले जाती है। इसलिए,महिलाओं को अपने अधिकारों का ठीक से दायित्व निभाकर अपने परिवार और देश की रीढ़ की मजबूत हड्डी बनना होगा। तभी हम गर्व से कहेंगे कि सिर्फ ८ मार्च नहीं,हर दिन हमारा है।

परिचय-प्रभावति श.शाखापुरे की जन्म तारीख २१ जनवरी एवं जन्म स्थान-विजापुर है। वर्तमान तथा स्थाई पता दांडेली, (कर्नाटक)ही है। आपने एम.ए.,बी.एड.,एम.फिल. और पी.एच-डी. की शिक्षा प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र-प्रौढ़ शाला में हिंदी भाषा की शिक्षिका का है। इनकी लेखन विधा-तुकांत, अतुकांत,हाईकु,कहानी,वर्ण पिरामिड, लघुकथा,संस्मरण और गीत आदि है। आपकी विशेष उपलब्धि-श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान मिलना है। श्रीमती शाखापुरे की लेखनी का उद्देश्य-कलम की ताकत से समाज में प्रगति लाने की कोशिश,मन की भावनाओं को व्यक्त करना,एवं समस्याओं को बिंबित कर हटाने की कोशिश करना है।