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माँ जीवन विकल्प

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’
इंदौर (मध्यप्रदेश )
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माँ बिन….

हवाओं बिन श्वांस ले सकते नहीं,
माँ बिन नहीं नवजीवन जन्मता
सत्य के बिना, शिव मिलते नहीं,
माँ बिन मिले नहीं शरीर सुंदरता।

सूरज के बिन जैसे रश्मियाँ नहीं,
माँ बिन जीवन में न उज्जवलता
शशि बिन सर्द, उजियारी रात्रि नहीं,
माँ आँचल से जीवन में शीतलता।

पर्वत बिन दृढ़ता का उदाहरण नहीं,
माँ जितनी न किसी में विश्वसनीयता
धरती जैसी किसी में भी धैर्यता नहीं,
माँ के मन में ही क्षमादान की क्षमता।

माँ के समान पहला ज्ञानी गुरु नहीं,
किसी भी रिश्तें में मिली नहीं ममता
माँ के बिन कोई भरण-पोषण नहीं,
कौन कर सके यहाँ माता सी चिंता।

सुकर्म के बिन श्रेष्ठ सफलता नहीं,
माँ बिन पाए न व्यवहार में विनम्रता
माँ वात्सल्य से बड़ा कोई प्रेम नहीं,
माँ बिन जैसी न, अन्य में महानता।

माँ बिन जन्म लेने के विकल्प नहीं,
मृत्यु प्राप्ति के लिए कई विकल्पता।
माँ के आशीष को प्रभु टालते नहीं,
माँ के चरणों में ही स्वर्ग की दिव्यता॥

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