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मेधावी बन सकें

डाॅ. पूनम अरोरा
ऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)
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जीवन बेहद अद्भुत है, असीम है, अगाध है। यह अनन्त रहस्यों को संजोए एक विशाल साम्राज्य है, जहाँ मानव कर्म करते हैं। कुछ परीक्षाएं उत्तीर्ण कर लेने अथवा किन्ही विषयों में प्रवीणता हासिल कर लेने की अपेक्षा जीवन को समझना कहीं अधिक कठिन है।
निश्चित रूप से हमारी शिक्षा पूर्णतः व्यर्थ साबित होगी, यदि वह हमारे विशाल, विस्तीर्ण जीवन, इसके समस्त रहस्यों, इसकी अद्भुत रमणीयताओं, हर्ष को व दुःखों को समझने में सहायता न करे। ढेर उपाधियाँ प्राप्त कर लेने के बाद भी क्या होगा ? यदि हमारा-आपका मन ही इन्हें पाने की प्रक्रिया में चिंतित व कुंठित हो जाए। इसलिए किशोरावस्था से ही खोजना होगा कि यह जीवन क्या है ? और शिक्षा का प्रमुख कार्य है कि, वह आप और हममें उस ‘मेधा’ का उद्घाटन करे, जिससे कि हम इन समस्त समस्याओं का हल खोज सकें।
क्या आप जानते हैं कि यह मेधा क्या है ? निःसंदेह मेधा वह शक्ति है, जिससे आप भय और सिद्धांतों की अनुपस्थिति में स्वतंत्रता के साथ सोचते हैं, ताकि आप अपने लिए सत्य की, वास्तविकता की खोज कर सकें। यदि आप भयभीत हैं, तो फिर आप कभी मेधावी नहीं हो सकेंगे।
किसी भी प्रकार की महत्वाकांक्षा-चाहे वह आध्यात्मिक हो या सांसारिक, चिन्ता और भय को जन्म देती है। अतः यह ऐसे मन का निर्माण करने में सहायता नहीं कर सकती, जो सुस्पष्ट हो, सरल हो, दूसरे शब्दों में मेधावी हो।
प्रत्येक मनुष्य किसी न किसी के विरोध में खड़ा हुआ है, और किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए प्रतिष्ठा, सम्मान, शक्ति व आराम के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा है। सम्पूर्ण विश्व ही परस्पर विरोधी विश्वासों, विभिन्न वर्गों, जातियों, पृथक विरोधी राष्ट्रीयताओं और हर प्रकार की मूढ़ता व क्रूरता से छिन्न-भिन्न हुआ जा रहा है, और यही वह दुनिया है, जिसमें रह सकने हेतु आप सुरक्षित किए जा सकते हैं।
आज हमें पूर्ण स्वतंत्रता की आवश्यकता है, सुदूर भविष्य में नहीं अपितु इसी क्षण, नहीं तो हम सभी नष्ट हो जाएंगे। हमें अविलंब एक स्वतंत्रतापूर्ण वातावरण तैयार करना होगा, ताकि आप उसमें रहकर अपने लिए सत्य की खोज कर सकें, आप मेधावी बन सकें। आप विश्व को स्वीकार न करें, अपितु उसके साथ संघर्ष करने में समर्थ हो सकें, ताकि आप अपने अंतः में सतत एक गहरी मानसिक क्रांति की अवस्था में रह सकें।

परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से बसी हुई हैं। इनका जन्म २२ अगस्त १९६७ को रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) में हुआ है। शिक्षा- एम.ए.,एम.एड. एवं पीएच-डी.है। आप कार्यक्षेत्र में शिक्षिका हैं। इनकी लेखन विधा गद्य-पद्य(मुक्तक,संस्मरण,कहानी आदि)है। अभी तक शोध कार्य का प्रकाशन हुआ है। डॉ. अरोरा की दृष्टि में पसंदीदा हिन्दी लेखक-खुशवंत सिंह,अमृता प्रीतम एवं हरिवंश राय बच्चन हैं। पिता को ही प्रेरणापुंज मानने वाली डॉ. पूनम की विशेषज्ञता-शिक्षण व प्रशिक्षण में है। इनका जीवन लक्ष्य-षड दर्शन पर किए शोध कार्य में से वैशेषिक दर्शन,न्याय दर्शन आदि की पुस्तक प्रकाशित करवाकर पुस्तकालयों में रखवाना है,ताकि वो भावी शोधपरक विद्यार्थियों के शोध कार्य में मार्गदर्शक बन सकें। कहानी,संस्मरण आदि रचनाओं से साहित्यिक समृद्धि कर समाजसेवा करना भी है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘हिंदी भाषा हमारी राष्ट्र भाषा होने के साथ ही अभिव्यक्ति की सरल एवं सहज भाषा है,क्योंकि हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। हिंदी एवं मातृ भाषा में भावों की अभिव्यक्ति में जो रस आता है, उसकी अनुभूति का अहसास बेहद सुखद होता है।