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मेरे देश का किसान

डॉ. कुसुम लता डोगरा,
पठानकोट(पंजाब
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मेरे देश का किसान स्पर्धा विशेष…..

मेरे देश का
किसान नहीं टूटता,
सब झेल लेता है
सोख लिया करता है,
अपने अंदर के भाव
समय के उतार-चढ़ाव,
कसम से…।

मेदिनी की तरह
जो सींच लिया करती है,
धीरे-धीरे से
बाढ़ के बहाव को,
टूटे हुए बांध को
शहीद के लहू को,
और किसी टूटे हुए दिल के
आँसुओं को भी
कसम से…॥

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