नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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‘गीत-संगीत की अमिट पहचान’ (स्व. आशा भोसले विशेष)…
हृदय में संगीत को बसाए हुए,
दीनानाथ थे सुरों के आधार,
लता थीं उनकी प्रथम सुपुत्री,
आशा ने बढ़ाया आगे यह संसार।
अपनी गायकी से सबको हर्षाया,
नवयुवकों के लिए पॉप भी गाया
छा गई मदहोशी, ऐसा सुर आया,
अपने परिवार का मान बढ़ाया।
ऐसी हैं हमारी आशा भोसले,
संगीत के सुर से बढ़ाए हौसले
कोकिल-सी वाणी, बुलबुल-से बोल,
हर दिल पर छा गईं आशा भोसले।
शास्त्रीय हो या पॉप की बहार,
हिंदी गीतों की गायिका सदाबहार
हज़ारों गीतों से रचा इतिहास,
इसीलिए याद करें उन्हें बार-बार।
रोते को हँसना सिखाया,
बच्चों को ‘चंदा मामा दूर के’ सुनाया
दुल्हन को श्रृंगार सिखाया,
हर पल हँसना भी समझाया।
खुशियाँ हों या ग़म की घड़ी,
आशा ताई किसी से कम नहीं।
धन्य हैं वे सुरों की कोकिला,
जिन्हें शत-शत नमन करें हम सभी॥