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मैं नारी हूँ

सौदामिनी खरे दामिनी
रायसेन(मध्यप्रदेश)

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मैं नारी हूँ भारत की,मेरी शान निराली है,
मैं लक्ष्मी दुर्गा काली मैं लज्जा से भरी आली।
मैं नारी हूँ भारत की,मैं सीता सती सावित्री हूँ,
मैं इस स्नेह की पावन धारा हूँ
मैं हूँ माँ बहिन पुत्री दारा।
मैं रिश्तों की पहने माला मैं अबला हूँ मैं सबला हूँ,
मैं ममता की अगड़ाई हूँ।
मुझमें आँधी-तूफान जमाने के,
मैं गर्जन हूँ मैं तड़ित दामिनी
श्रृंगार की रसिक नायिका हूँ।
मैं सुहागन सौभाग्य की सिन्दूरी शाम,
मैं उषा की नयी किरण।
मैं उम्मीदों की आशा हूँ,
मैं भारत की अमिट भारती।
मैं निर्मल चंचल सरिता,
मैं बाट जोहती प्रेमिका हूँ
मुझसे राखी मैं दीप आवली-सी।
मैं नवरात्रि की गरबा-सी,मैं शान्त हृदय हृदेश्वरी-सी,
मैं पूनम की धवल चंद्रिका हूँ,मैं राधा और मीरा-सी।
मैं दर्द भरी बादरी-सी,मेघों के बीच ‘सौदामिनी’ हूँ।
मैं श्रृद्धा की अमिट बूँद-सी,मैं सहनशीलता की पराकाष्ठा हूँ।
मैं नारी हूँ,मैं नारी हूँ॥

परिचय-सौदामिनी खरे का साहित्यिक उपनाम-दामिनी हैl जन्म-२५ अगस्त १९६३ में रायसेन में हुआ हैl वर्तमान में जिला रायसेन(मप्र)में निवासरत सौदामिनी खरे ने स्नातक और डी.एड. की शिक्षा हासिल की हैl व्यवसाय-कार्यक्षेत्र में शासकीय शिक्षक(सहायक अध्यापक) हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,दोहा, ग़ज़ल,सवैया और कहानी है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय दामिनी की लेखनी का उद्देश्य-लेखन कार्य में नाम कमाना है।इनके लिए प्रेरणापुन्ज-श्री प्रभुदयाल खरे(गज्जे भैया,कवि और मामाजी)हैंl भाषा ज्ञान-हिन्दी का है,तो रुचि-संगीत में है।