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राम हमारे प्राण हैं…

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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राम हमारी साँसों में बसे
राम हमारे प्राण हैं,
अंतर-आत्मा की शुद्धिकरण
की अनमोल संजीवनी राम है।

चरित्र निर्माण की, व्यक्ति विकास की,
हम सबके अटूट विश्वास की
उस प्रभावमान धारा का नाम राम है।

घनघोर अंधेरे में, तपती गर्मी में, तेज वर्षा हो या कंपकंपाती ठंड में,
हम सबके लिए, हमारे तो रखवाले राम हैं।

राम प्रकाश है, राम शीतलता का स्नेह है,
राम सुरक्षा के लिए सहारा है,
राम ऊर्जा है राम ऊष्मा है।

राम वह दीपक है, जो सदा प्रज्वलित रहता है,
और हम सबको प्रेरित करता है।

राम हम सनातनियों के लिए
आस्था व विश्वास है,
राम हमारी साँसों में बसे, राम हमारे प्राण हैं…॥