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राहुल गांधी की राजनीतिक अपरिपक्वता है मसूद अजहर ‘जी’

अजय जैन ‘विकल्प
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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मुझे राहुल गांधी की बुद्धि पर पहली बार नहीं,पहले भी कई बार तरस आया है। समझ नहीं आता कि एक राष्ट्रीय और बरसों पुराने राष्ट्रीय दल का सर्वे-सर्वा किसी आतंकी को ‘जी’ लगाकर कैसे संबोधित कर सकता है। मान लीजिए कि यदि कांग्रेस पार्टी के प्रमुख राहुल गांधी को उनके विश्वस्त नेताओं ने आतंकी मसूद अजहर पर बोलने के लिए बना-बनाया भाषण दे भी दिया तो क्या राहुल गांधी को इतनी समझ नहीं है कि वे इस भाषण को एक बार पढ़ तो लें। पढ़ते तो शायद उनको यह चीज अच्छे से समझ में आ जाती कि आतंकी,किसी हस्ती और आम आदमी में क्या फर्क होता है,या ‘जी’ किसके
लिए उपयोग किया जाता है। यदि राहुल गांधी को इतनी भी समझ नहीं है तो मानना पड़ेगा कि निश्चित रूप से वे राष्ट्रीय नेता तो ठीक,बौद्धिक स्तर पर प्रादेशिक भी नहीं हैं। इस लापरवाही या कहें कि गलती के लिए राहुल गांधी एक नागरिक और राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। ऐसा लगता है कि ‘राफेल’ को चुनावी नदी पार करने की सफल नाव बनाने में जुटे राहुल गांधी को उनके ही दल के कार्यकर्ता और विश्वस्त सिपहसालार निपटाने में जुटे हैं,वरना क्या इतनी-सी बात किसी को समझ में नहीं थी कि अंतरराष्ट्रीय आतंकी के लिए ‘जी’ जैसे शब्द का घोषित-अघोषित इस्तेमाल किया जाना चाहिए या नहीं।
इस बार पुलवामा हमले पर मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जुबान फिसली है या फिसलाई ही गई,और आतंकी मसूद अजहर को ये ‘जी’ बोल गए,या बुलवाया गया,ये तो कांग्रेसी ही बेहतर जानते हैं,पर इस मामले ने भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का फिर मौका दे दिया है।
दिल्ली में बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन में राहुल गांधी ने आतंकी मसूद अजहर को ‘जी’ कहकर संबोधित कर दिया,तो भाजपा ने तुंरत इसे अपने ट्विटर पृष्ठ पर साझा कर दिया। वर्षों पहले आतंकियों को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी ऎसे ही सम्मान दे चुके हैं,जबकि उनको तो राजनीति की राहुल गांधी से अधिक समझ और अनुभव है।
दरअसल एनएसए अजीत डोभाल पर तंज कसने के दौरान राहुल गांधी ने कहा-“पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के ४० से ४५ जवान शहीद हो गए थे. सीआरपीएफ बस पर किसने बम फोड़ा ? जैश-ए-मोहम्मद…मसूद अजहर ने…आपको याद होगा ना ? यह वही मसूद अजहर है,जिसे ५६ इंच वालों की तब की सरकार ने एयरक्राफ्ट में मसूद अजहर जी के साथ बैठकर अजीत डोभाल कंधार में हवाले करके आ गए थे।” इस दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी चिरपरिचित शैली में फिर “चौकीदार चोर है” भी कहा,पर प्रधानमंत्री को लपेटने के चक्कर में खुद ही ‘जी’ के लपेटे में आ गए।
आतंकी मसूद अजहर को राहुल गांधी द्वारा ‘जी’ कहकर संबोधित करने पर आमजन में राहुल गांधी की साख फिर खराब ही हुईं है। संसद भवन में प्रधानमंत्री के जबरन गले पड़ने,आँख मारने,आलू की फैक्टरी लगाने,सोना बनाने और दस दिन में कर्ज माफ करने के वादे से पलटने जैसे कई कारण हैं,जिनसे विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त राहुल गांधी की परिपक्वता पर मतदाता को शक होता है। इनके प्रमुख नेताओं और सोनिया गांधी को चाहिए कि अभी इनको और मांजें-सिखाएं-समझाएं,वरना आगे भी ऎसे
‘पप्पूनुमा’ चमत्कार राहुल गांधी करते रहेंगे,और कार्यकर्ता-नेता एवं आमजन इनके जादू पर हँसते ही रहेंगे,जिसका खामियाजा दल को ही उठाना पड़ेगा,ऊपर से अभी तो चुनावी बेला है।