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रोगी के लिए देवदूत नर्स

ललित गर्ग
दिल्ली
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अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस (१२ मई)विशेष…

एक चिकित्सक और रोगी के बीच में सूत्रधार की भूमिका निभाते हुए एक नर्स उसे स्वस्थ ही नहीं करती, बल्कि तमाम तरह की असुविधाओं में रहकर, खुद को अपने परिवार से अलग रखकर, निरन्तर अपनी सेवाएं देती है। यह करते हुए वे कोई शिकायत नहीं करती एवं आशा नहीं खोती। वास्तव में उनकी निःस्वार्थता एवं सेवाभावना उन्हें रोगियों के लिए स्वर्गदूत बनाती है, एक फरिश्ते के रूप में वे जीवन का आश्वासन बनती है और उनका बलिदान-योगदान उन्हें मानवीय सेवा का योद्धा बनाता है। यदि चिकित्सक किसी रोगी के रोग को ठीक करता है तो उसके दर्द को कम एक नर्स करती है। एक नर्स ना केवल अपना व्यवसाय समझ रोगी की सेवा करती है, बल्कि वो उससे भावनात्मक रुप से जुड़ जाती है और उसे ठीक करने में जी-जान लगा देती है। नर्सों के इसी योगदान को सम्मानित करने एवं उनके कार्यों की सराहना करने हेतु प्रतिवर्ष १२ मई को ‘अंतराष्ट्रीय नर्स दिवस’ मनाया जाता है।
नर्से भगवान का रूप होती है, वे ही इंसान के जन्म की पहली साक्षी बनती है और उनमें करुणा का बीज बोती है। एक रोगी को स्वस्थ करने में वे अपना सब कुछ दे देती हैं। रोगी की सेवा करते हुए वे अपना पारिवारिक सुख, भविष्य, जीवन और वर्तमान सबकुछ झोंक देती है। अब हमारा यह नैतिक कर्तव्य है कि हम उनकी अनूठी एवं निःस्वार्थ सेवाओं के बदले वापस कुछ लौटाएं और उनका भविष्य उन्नत करें। इस दिवस को मनाते हुए हम नर्सों के करियर को फिर से परिभाषित कर उनकी सेवा का मूल्यांकन करते हुए कौशल विकास की शक्ति के साथ उनके जीवन को बदलें। कोविड-१९ के संकट में एक योद्धा की तरह हर मुश्किल घड़ी में अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों के साथ जो खड़ी रही, वे नर्स ही थी, जिन्हें हम और आप अक्सर ‘सिस्टर’ कह कर पुकारते हैं। आम दिन हो या महामारियों के खिलाफ जंग, ये नर्स बिना किसी डर के सहजता और उत्साह से अपने कर्तव्य का पालन करती है। इसलिए नहीं कि, यह उनका काम है और उन्हें पैसे मिलते हैं। इसलिए कि, वह सबसे पहले दूसरों के स्वस्थ होने और उनकी जान की फिक्र करती हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में माँ के स्वरूप में स्नेहपूर्ण और फिक्र के साथ हर किसी की देखभाल और परवाह करने के शब्द को ही नर्स कहा जाता है। वे अस्पताल की रीड होती है। लियो बुशकाग्लिया ने कहा भी है कि एक नर्स का एक स्पर्श, मुस्कुराहट, प्यारी बोली, ईमानदारी और देखभाल की सबसे छोटी क्रिया में सभी में जीवन को मोड़ने की क्षमता होती है।’
उनकी स्वरित एवं मुस्कानभरी सेवाएं निश्चित ही बीमारी एवं दर्द को दूर करने का सशक्त माध्यम है। पूरी दुनिया में हम इस बात को नजरअंदाज नहीं कर सकते कि नर्सिंग सेवाएं दुनिया में सबसे बड़ी स्वास्थ्य देखभाल का पेशा है। रोगियों के स्वास्थ्य और कल्याण को बनाए रखने के लिए नर्सों का प्रशिक्षण एवं कौशल विकास अपेक्षित है, भारत की नर्सों को नई ऊर्जा, नई दिशा एवं नया परिवेश मिले, उसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार कोई प्रभावी योजना लागू करें ताकि, वे और अधिक अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं देने में सक्षम हो सकें। इससे भारत की नर्सों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित होगा। ऐसी योजनाओं को निजी अस्पतालों को भी प्रोत्साहन देना चाहिए। नर्सों का बस एक ही उद्देश्य होता है कि उनकी देखभाल में आया हुआ मरीज ठीक होकर हॅंसते हुए घर जाए। मरीज जब ठीक होकर मुस्कुराते हुए अपने परिवार वालों के साथ घर जाता है, तो वह खुशी नर्सों को और भी हिम्मत देती है।

नर्सों की सेवाएं जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही विश्व स्तर पर उनकी जरूरत है। अपेक्षित नर्सों की उपलब्धता न होना, एक चिन्तनीय विषय है। विश्व बैंक की एक ताजा रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अच्छे वेतनमान और सुविधाओं के लालच में आज भी विकासशील देशों से बड़ी संख्या में नर्स विकसित देशों में नौकरी के लिए जाती है जिससे विकासशील देशों को प्रशिक्षित नर्साें की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से निपटने एवं नर्सों की सराहनीय सेवा को मान्यता प्रदान करने के लिए भारत सरकार के परिवार एवं कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगल पुरस्कार की शुरुआत की। नर्स ही स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। ऐसी मानवीय सेवा की अदभुत फरिश्तों के कल्याण एवं प्रोत्साहन का चिन्तन अपेक्षित है।

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