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वकील भी अंग्रेजी में कार्य के अभ्यस्त, उचित कदम की आवश्यकता

अभ्यास वर्ग…

सोनीपत (हरियाणा)।

हरियाणा राजभाषा अधिनियम में संशोधन के द्वारा १ अप्रैल २०२३ से अधीनस्थ न्यायालयों की भाषा हिंदी कर दी गई है लेकिन इसे कार्यप्रणाली में लाना सबसे कठिन कार्य है, क्योंकि अभी भी विधि शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी है। यही नहीं, वर्तमान में आठवीं के ऊपर की कक्षाओं में हिंदी विषय अनिवार्य भी नहीं है और ज्यादातर विषय अंग्रेजी में पढ़ाए जाते हैं। वकील भी अंग्रेजी में कार्य करने के अभ्यस्त हैं। इस दिशा में उचित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
यह बात सोनीपत के अग्रसेन भवन में ‘भारतीय भाषा अभियान’ द्वारा १३-१४ मई को उत्तर व पश्चिमी उप्र क्षेत्र के अधिवक्ताओं तथा न्यायपालिका से जुड़े व्यक्तियों के अभ्यास वर्ग के प्रथम दिन उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि बलदेवराज महाजन (महाधिवक्ता, हरियाणा सरकार) ने कही।
मुख्य वक्ता एवं भारतीय भाषा अभियान के संरक्षक अतुल भाई कोठारी ने कहा कि, समय आ गया है कि सभी उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में भारतीय भाषाओं में न्याय की व्यवस्था की जाए। अब उन्नत प्रौद्योगिकी की मदद से यह करना आसान हो गया है। इस कार्य के लिए शिक्षा का माध्यम बदलने की भी आवश्यकता है।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि तथा दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि के कुलपति प्रो. राजेंद्र अनायत ने घोषणा की कि, उनके विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को अपनी उत्तर पुस्तिकाएं हिंदी अथवा हिंदी अंग्रेजी मिश्रित भाषा में लिखने का विकल्प प्रदान कर दिया गया है। इस कारण विद्यार्थियों को अंग्रेजी की बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
विशिष्ट अतिथि कुलपति अर्चना मिश्रा (भीमराव आम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विवि) ने इस अवसर पर कहा कि उच्च न्यायालय की भाषा अंग्रेजी होने से ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर लोग विधि प्रक्रिया को समझ न पाने के कारण अन्याय के शिकार हो जाते हैं इसलिए जनभाषा को न्याय की भाषा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि कल से ही विवि में विद्यार्थियों को हिंदी में अथवा हिंदी अंग्रेजी मिश्रित भाषा में अभिव्यक्ति का विकल्प दिया जाएगा। दोनों घोषणाओं का जोरदार स्वागत किया गया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में जयदीप राय (सर्वोच्च न्यायालय में मध्यप्रदेश शासन के अपर महाधिवक्ता) तथा अभा अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय मंत्री पद्मकांत द्विवेदी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भारतीय भाषा अभियान की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
द्वितीय सत्र संविधान तथा विधान में भारतीय भाषाओं के संबंध में था। इसमें जयदीप राय ने संविधान निर्माण के समय भारतीय भाषाओं को दरकिनार किए जाने और उससे संबंधित निर्णय प्रक्रिया आदि की जानकारी दी। इसके पश्चात ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के निदेशक डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ द्वारा वर्तमान में संविधान एवं विधान में भारतीय भाषाओं की स्थिति प्रस्तुत करते हुए न्याय प्रक्रिया एवं शासन-प्रशासन में भारतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाने के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की गई। इसके पश्चात पटना से उपस्थित अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद ने उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में अपने भाषाई संघर्ष की जानकारी दी। इस सत्र में मंच पर उच्च न्यायालय में अतिरिक्त महाधिवक्ता जसपाल कौशल और मनोरंजन डोगरा भी उपस्थित रहे।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई)

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