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विडम्बना

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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कैसी विडम्बना है,
जब आदमी का बुरा वक्त आता है
तो अपने भी साथ छोड़ जाते हैं,
और अच्छे वक्त में दूर के रिश्ते भी
साथ निभाने चले आते हैं।
लेकिन शायद उनको,
ये पता नहीं होता कि जो शब्द
उन्होंने बुरे वक्त में,
इस्तेमाल किए हैं
वो कभी भूले नहीं जाते,
जन्म-जन्मांतर साथ निभाते हैं।

आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना,
रिश्तों की बुनियाद को
तहस-नहस कर देता है,
फिर रिश्ते बनाना मुश्किल ही नहीं
नामुमकिन-सा हो जाता है।

माँ-बाप के गुजर जाने पर,
बेटी को अपने ही घर जाने पर
झिझक होना,
भाई और भाभी का नज़रें चुराना
निश्चित विडम्बना का विषय है।
जो रिश्तों की नींव को,
धंसने पर मजबूर कर देता है॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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