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विरह

डाॅ. पूनम अरोरा
ऊधम सिंह नगर(उत्तराखण्ड)
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व्यतीत हो गया दिन,
दिन का राजा
पश्चिम में जाकर,
अंतिम और लालसा
भरी दृष्टि से,
दृष्टिपात करता हुआ
ओझल हो गया,
अंधेरा छाने लगा
सफेद प्रकाश पड़ने लगा,
सांयकाल हुआ नहीं
पर हो रहा है…।

दिखाई देता एक जंगल,
कुछ परे आबादी सी भी
आबादी कैसी सी ?,
ना स्त्री न पुरूष ना बच्चे
सघन वृक्षों के झुंड,
तभी दूर से दिखाई दी
झुंड के बीच एक कुटिया,
कुटिया के बाहर एक तरफ
आसन और धूनी रमी हुई,
उसके सामने चबूतरा…।

कुछ समय उपरांत,
दिखाई दी वहाँ से कोई
आती सिर झुकाए,
आकर समक्ष खड़ी हो गई
अति सुन्दर स्त्री…,
देख रह गया स्तब्ध
खोज रहा था वर्षों से,
सर झुका चरणों में उसके।

लेकिन ये क्या!
प्रसन्न हो हो कर,
प्यार सहित गाती
ऊपर चढ़ती चढ़ती,
मुझ पर दृष्टि डालती…।

आकाश में,
किरण की भांति चमकती
दूर होती मंद पड़ती,
सुगंधित
फुहार बिखेरती।
सन सी,
बादलों में गुम हो गई॥

परिचय–उत्तराखण्ड के जिले ऊधम सिंह नगर में डॉ. पूनम अरोरा स्थाई रुप से बसी हुई हैं। इनका जन्म २२ अगस्त १९६७ को रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) में हुआ है। शिक्षा- एम.ए.,एम.एड. एवं पीएच-डी.है। आप कार्यक्षेत्र में शिक्षिका हैं। इनकी लेखन विधा गद्य-पद्य(मुक्तक,संस्मरण,कहानी आदि)है। अभी तक शोध कार्य का प्रकाशन हुआ है। डॉ. अरोरा की दृष्टि में पसंदीदा हिन्दी लेखक-खुशवंत सिंह,अमृता प्रीतम एवं हरिवंश राय बच्चन हैं। पिता को ही प्रेरणापुंज मानने वाली डॉ. पूनम की विशेषज्ञता-शिक्षण व प्रशिक्षण में है। इनका जीवन लक्ष्य-षड दर्शन पर किए शोध कार्य में से वैशेषिक दर्शन,न्याय दर्शन आदि की पुस्तक प्रकाशित करवाकर पुस्तकालयों में रखवाना है,ताकि वो भावी शोधपरक विद्यार्थियों के शोध कार्य में मार्गदर्शक बन सकें। कहानी,संस्मरण आदि रचनाओं से साहित्यिक समृद्धि कर समाजसेवा करना भी है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘हिंदी भाषा हमारी राष्ट्र भाषा होने के साथ ही अभिव्यक्ति की सरल एवं सहज भाषा है,क्योंकि हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। हिंदी एवं मातृ भाषा में भावों की अभिव्यक्ति में जो रस आता है, उसकी अनुभूति का अहसास बेहद सुखद होता है।