कुल पृष्ठ दर्शन : 465

You are currently viewing विवशता

विवशता

वंदना जैन
मुम्बई(महाराष्ट्र)
************************************

हो हरित वसुन्धरा….

वृक्ष खड़ा-खड़ा सुनता रहता है,
नारेबाजी अपने बचाव में
न शाखाओं को आदेश दे सकता है,
आरियों से लोहा लेने का
न ही जड़ों को बना कर तलवार,
युद्ध लड़ सकता है।

कुछ दोमुँहे साँप आते हैं,
एक मुँह से नारेबाजी करके
पेड़ का कटना,
रोक देते हैं कुछ समय के लिए।

ये रक्षक बन कर खड़े हो जाएंगे,
दफ्तरों,न्यायालयों में
फिर कोई बिल्डर आएगा,
खरीद लेगा इन आवाजों को
और ये आवाजें बिक जाएंगी,
अपने घर की टेबिल-कुर्सी
और एक कमरे के लिए।

सुनियोजित हार का हार पहनने के पश्चात्,
बैठेंगे दफ्तर में यही साँप
नए शोर की योजना बनाने के लिए।

वृक्षों की छाती पर बैठकर,
जंगलों की दबी कुचली चीखों को
रिश्वत के संगीत में मदमस्त होकर,
डिनर करने के लिए
फिर से निकल पड़ेंगे,
आरियों के पीछे डसने के लिए।

वृक्ष तब भी खड़ा रहेगा,
अंत समय तक
अपनी छाँव का आँचल देने के लिए।
इन्हीं मानव रूपी सर्पों की,
थकान को कुछ देर सुस्ताने के लिए॥

परिचय-वंदना जैन की जन्म तारीख ३० जून और जन्म स्थान अजमेर(राजस्थान)है। वर्तमान में जिला ठाणे (मुंबई,महाराष्ट्र)में स्थाई बसेरा है। हिंदी,अंग्रेजी,मराठी तथा राजस्थानी भाषा का भी ज्ञान रखने वाली वंदना जैन की शिक्षा द्वि एम.ए. (राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन)है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि बतौर सामाजिक मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत व लेख है। काव्य संग्रह ‘कलम वंदन’ प्रकाशित हुआ है तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होना जारी है। पुनीत साहित्य भास्कर सम्मान और पुनीत शब्द सुमन सम्मान से सम्मानित वंदना जैन ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी उपलब्धि-संग्रह ‘कलम वंदन’ है तो लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा वआत्म संतुष्टि है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नागार्जुन व प्रेरणापुंज कुमार विश्वास हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार व सामाजिक विषय पर लेखन की है। जीवन लक्ष्य-साहित्य के क्षेत्र में उत्तम स्थान प्राप्त करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘मुझे अपने देश और हिंदी भाषा पर अत्यधिक गर्व है।’

 

Leave a Reply