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विश्वगुरु भारत

कवि योगेन्द्र पांडेय
देवरिया (उत्तरप्रदेश)
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कहीं अंधकार में ना, डूब जाए तरुणायी,
क्रांति की मशाल तन-मन में जलाना है।
भोर के समय यहाँ, सोए हुए लोग हैं जो,
जागरण गीत लिख, उनको जगाना है।

भारती की रक्षा हेतु, हमने लिया जो प्रण,
प्राण त्याग कर के भी, वचन निभाना है।
राह यह प्रगति की, थोड़ी है कठिन किंतु,
विश्वगुरु हमको तो, बन के दिखाना है॥