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वो है निशानी

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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वो है मेरी प्यार निशानी।
जिसके बिन बेकार जवानी॥
निशदिन रहती उसकी कायल।
क्या सखि साजन ? ना सखि पायल॥

जिससे जुड़ जाता है नाता।
वो ही मेरा भाग्य विधाता॥
इस तन का वो ही अधिकारी।
क्या सखि साजन ? ना, बनवारी॥

मेरी इज्जत का रखवाला।
करती जिस पर देह हवाला॥
खुश रहती हूँ, ना कुछ लफड़ा।
क्या सखि साजन ? ना सखि कपड़ा॥

करती हूँ जिसका नित दर्शन।
मेरा तन-मन उसको अर्पण॥
वो ही मेरा देव अधीश्वर।
क्या सखि साजन ? ना सखि ईश्वर॥

आँखों में मैं जिसे बसाती।
सदा-सदा उसका गुण गाती॥
करती हूँ जिसका नित वंदन।
क्या सखि साजन ? ना, रघुनंदन॥

जीवन का आधार वही है।
मेरा सब कुछ सार वही है॥
जिस पर लगता है मेरा मन।
क्या सखि साजन ? ना सखि है धन॥

सुन्दर मुखड़ा काम निराला।
दिखता है वो भोला भाला॥
मन से गोरा तन से काला।
क्या सखि साजन ? ना, गोपाला॥

करती हूँ मैं ध्यान उसी का।
सुबह शाम यशगान उसी का॥
उसके बिन यह जीवन रीता।
क्या सखि साजन ? ना सखि गीता॥

परिचय- बोधन राम निषादराज की जन्म तारीख १५ फरवरी १९७३ और स्थान खम्हरिया (जिला-बेमेतरा) है। एम.कॉम. तक शिक्षित होकर सम्प्रति से शास. उ.मा.वि. (सिंघनगढ़, छग) में व्याख्याता हैं। आपको स्व.फणीश्वर नाथ रेणू सम्मान (२०१८), सिमगा द्वारा सम्मान पत्र (२०१८), साहित्य तुलसी सम्मान (२०१८), कृति सारस्वत सम्मान (२०१८), हिंदीभाषा डॉट कॉम (म.प्र.) एवं राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान (२०१९) सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।
प्रकाशित पुस्तकों के रूप में आपके खाते में हिंदी ग़ज़ल संग्रह ‘यार तेरी क़सम’ (२०१९), ‘मोर छत्तीसगढ़ के माटी’ सहित छत्तीसगढ़ी भजन संग्रह ‘भक्ति के मारग’ ,छत्तीसगढ़ी छंद संग्रह ‘अमृतध्वनि’ (२०२१) एवं छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल संग्रह ‘मया के फूल’ आदि है। वर्तमान में श्री निषादराज का बसेरा जिला-कबीरधाम के सहसपुर लोहारा में है।

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